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अभा अखाड़ा परिषद अध्यक्ष ने लगाए गंभीर आरोप, महंत रवींद्र पुरी बोले- दान लेने वाला वक्फ बोर्ड कभी दान नहीं देता

अभा अखाड़ा परिषद अध्यक्ष ने वक्फ बोर्ड पर लगाए गंभीर आरोप, उठाए कई सवाल, patrika.com पर आब भी पढ़ें महंत रवींन्द्र पुरी से पत्रिका की खास बातचीत के कुछ अंश...

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Waqf Board

अखाड़ा परिषद अध्यक्ष महंत रवीन्द्र पुरी ने वक्फ बोर्ड पर लगाया गंभीर आरोप

Waqf Board: अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रवींद्र पुरी ने शुक्रवार को उज्जैन में वक्फ बोर्ड की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि वक्फ बोर्ड जिस उद्देश्य से बनाया गया था, वह पूरा नहीं कर रहा है। यह केवल संपत्तियों का प्रबंधन करता है, लेकिन समाज सेवा की जिम्मेदारी से दूर भागता है। महंत रवींद्र पुरी के सवालों से वक्फ बोर्ड की कार्यशैली पर नई बहस छिड़ सकती है। अखाड़ा परिषद अध्यक्ष से चर्चा के अंश...

आप वक्फ बोर्ड की भूमिका पर सवाल उठा रहे हैं, क्या कारण हैं?

जवाब: वक्फ बोर्ड को समाज के कल्याण के लिए बनाया गया था, लेकिन आज यह सिर्फ जायदाद संभालने वाला बोर्ड बनकर रह गया है। मैं पूछना चाहता हूं, जब कोरोना काल में हजारों लोग दवा और भोजन के लिए संघर्ष कर रहे थे, तब वक्फ बोर्ड ने कितनों की मदद की? क्या किसी गरीब को एक कप चाय भी दी?

सवाल: क्या आपको लगता है कि वक्फ बोर्ड को अपनी कार्यप्रणाली में बदलाव लाना चाहिए?

जवाब: बिल्कुल! धार्मिक और सामाजिक संगठनों का कर्तव्य सिर्फ संपत्तियां संभालना नहीं, बल्कि जरूरतमंदों की सेवा करना भी है। सनातन धर्म में देखें, हमारे संत-महंत के पास जो भी दान आता हैं, समाज को दान करते हैं। पर वक्फ बोर्ड सिर्फ दान लेना जानता है, देना नहीं। यही इसका सबसे बड़ा दोष है।

सवाल: आपने वक्फ संपत्तियों को लेकर भी सवाल उठाए हैं?

जवाब: हां, क्योंकि छोटी-छोटी मजारों तक को वक्फ बोर्ड ने जबरन अपने अधिकार में ले लिया था। जब सरकार ने इस पर कार्रवाई की, तो गरीब मुसलमान खुश हुए, क्योंकि जो गलत था, उसे सुधारा गया।

सवाल: आप सरकार के कदम को किस तरह देखते हैं?

जवाब: प्रधानमंत्री और गृहमंत्री को साधुवाद, जिन्होंने सही निर्णय लिया। यह गरीब मुसलमानों के हक में एक बड़ा कदम है। अब समय आ गया है कि वक्फ बोर्ड अपनी भूमिका पर पुनर्विचार करे और समाज के हित में काम करे।

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