
उज्जैन में बनेंगे प्रवेश द्वार (Photo Source- Patrika)
Sanatan Dharma Pride :मध्य प्रदेश की धर्मनगरी उज्जैन अबतक महाकाल मंदिर और महाकाल लोक के लिए देशभर में प्रसिद्ध है, लेकिन जल्द ही शहर अपने प्रवेश द्वारों के लिए भी खास पहचान स्थापित करने वाला है। उज्जैन विकास प्राधिकरण (यूडीए) ने शहर के नए प्रमुख मार्गों पर 92.25 करोड़ की लागत से 9 प्रवेश द्वार बनाने जा रहा है। ये परियोजना सिर्फ शहरी सौंदर्यीकरण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य उज्जैन की हजारों वर्षों पुरानी सनातन परंपरा, खगोल-कालगणना, सिंहस्थ संस्कृति और राजकीय गौरव को मूर्त रूप देना है।
जब कोई श्रद्धालु, पर्यटक या आगंतुक उज्जैन की सीमा में प्रवेश करेगा तो ये द्वार उसे एहसास कराएंगे कि, वह किसी साधारण शहर में नहीं, बल्कि काल, धर्म और मोक्ष की राजधानी में कदम रख रहा है। योजना के तहत इंदौर रोड, देवास रोड, आगर रोड, मक्सी रोड, बड़नगर रोड और सिंहस्थ से जुड़े प्रमुख मार्गों समेत विभिन्न दिशाओं से शहर में प्रवेश करने वाले मार्गों पर ये द्वार बनाए जाएंगे।
इन प्रवेश द्वारों की खास बात ये होगी कि, इनके आसपास सड़क चौड़ीकरण, सर्विस रोड, मीडियन, हरित पट्टी और सुगम ट्रैफिक व्यवस्था का भी खास ध्यान रखा जाएगा, ताकि शहर की पहली छवि भव्य, सुव्यवस्थित और गरिमामई मालूम हो सके।
9 प्रवेश द्वारों का डिजाइन पारंपरिक भारतीय स्थापत्य और आधुनिक इंजीनियरिंग तकनीक का संतुलित समन्वय होगा। निर्माण में बंसी पहाड़पुर के गुलाबी-सफेद पत्थर और जैसलमेर के पीले पत्थर का इस्तेमाल होगा। द्वारों पर 10 से 50 मि.मी तक की गहरी 3-डी नक्काशी होगी, जिसमें पौराणिक प्रसंग, धार्मिक प्रतीक, शेर, हाथी, मानव आकृतियां और सांस्कृतिक चिन्ह उकेरे हुए नजर आएंगे।
रात्रिकालीन दृश्य प्रभाव के लिए आरजीबीडब्ल्यू लाइटिंग, एलईडी डाउनलाइटर और डीएमएक्स कंट्रोलर आधारित प्रकाश व्यवस्था की जाएगी। ऊर्जा संरक्षण को ध्यान में रखते हुए सभी द्वारों पर सोलर सिस्टम भी लगाए जाएंगे, जिससे ये द्वार रात में भी उज्जैन की भव्य पहचान बनेंगे।
यूडीए के अनुसार सभी स्वीकृतियों के बाद 18 महीनों में सभी प्रवेश द्वारों के निर्माण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। निर्माण पूरा होने के बाद संबंधित एजेंसी को अगले पांच साल के लिए इसके संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी भी सौंपी जाएगी।
-अमृत द्वार 9.68 करोड़
-पांचजन्य द्वार 12.50 करोड़
-गज द्वार 8.51 करोड़
-कालगणना द्वार 11.07 करोड़
-उज्जैनी द्वार 6.48 करोड़
-सिंहस्थ द्वार 6.48 करोड़
-त्रिशुल द्वार 10.65 करोड़
-विक्रमादित्य द्वार 13.58 करोड़
-डमरू द्वार 13.29 करोड़
इतिहासकारों की मानें तो उज्जैन में प्रवेश द्वारों की परंपरा वर्षों पुरानी है। प्राचीन काल में नगर की सीमाओं पर बने द्वार न सिर्फ सुरक्षा के लिए होते थे, बल्कि नगर की पहचान, सांस्कृतिक गौरव और शक्ति के प्रतीक भी माने जाते थे। यूडीए की ये योजना उसी परंपरा को आधुनिक शहरी जरूरतों के अनुरूप पुनर्जीवित करने की कोशिश है।
-अमृत द्वार : समुद्र मंथन से निकले अमृत का प्रतीक, उज्जैन को मोक्ष और अमरत्व की भूमि के रूप में दर्शाता है।
-पंचजन्य द्वार : भगवान कृष्ण के शंख ‘पंचजन्य’ से प्रेरित, धर्म और विजय का प्रतीक।
-गज द्वार : भारतीय परंपरा में हाथी ऐश्वर्य, शक्ति और मंगल का संकेतक।
-कालगणना द्वार : उज्जैन की विश्वविख्यात कालगणना और खगोल परंपरा की पहचान।
-उज्जैनी द्वार : नगर की सांस्कृतिक आत्मा और ऐतिहासिक अस्मिता का प्रतीक।
-सिंहस्थ द्वार : विश्व प्रसिद्ध सिंहस्थ कुंभ के माध्यम से उज्जैन की वैश्विक धार्मिक पहचान को दर्शाता है।
-त्रिशूल द्वार : भगवान महाकाल के त्रिशूल का प्रतीक, सृजन–संरक्षण–संहार का दर्शन।
-विक्रमादित्य द्वार : सम्राट विक्रमादित्य के न्याय, शौर्य और उज्जैन की राजकीय परंपरा का प्रतीक।
-डमरू द्वार : शिव के डमरू से उद्भूत नाद, सृष्टि और समय चक्र का संकेत।
Updated on:
11 Feb 2026 12:21 pm
Published on:
11 Feb 2026 12:18 pm
