बांगरमऊ उपचुनाव - 30 दिन के अंदर योगी आदित्यनाथ की दूसरी यात्रा

- बांगरमऊ उपचुनाव ग्राउंड जीरो रिपोर्ट मतदाताओं की छुट्टी से उड़ी प्रत्याशियों की नींद

- भाजपा पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को सुप्रीम कोर्ट से सजा मिलने के बाद खाली हुई थी सीट

 

By: Narendra Awasthi

Updated: 26 Oct 2020, 04:55 PM IST

उन्नाव. विगत 30 दिन में दूसरी बार बांगरमऊ आकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ संदेश देने का प्रयास कर रहे हैं कि बांगरमऊ उपचुनाव उनके लिए कितना महत्वपूर्ण है। जहां पर दुष्कर्म के आरोपी भाजपा के पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की सदस्यता सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद समाप्त हो गई थी। योगी आदित्यनाथ आगामी 27 अक्टूबर को बांगरमऊ से भाजपा प्रत्याशी श्रीकांत कटियार के समर्थन में चुनावी जनसभा को संबोधित करने आ रहे हैं। मुख्यमंत्री के आगमन को देखते हुए जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। जिला अधिकारी के साथ पुलिस अधीक्षक ने कार्यक्रम स्थल में सुरक्षा व्यवस्था का निरीक्षण किया। गौरतलब है विगत 28 सितंबर को योगी आदित्यनााथ ने बांगरमऊ में कई परियोजनाओं का शुभारंभ किया था।

बांगरमऊ उपचुनाव में कांग्रेस से आरती बाजपेई के अतिरिक्त भाजपा ने श्रीकांत कटियार, बसपा ने महेश पाल व सपा ने सुरेश पाल को टिकट दिया है। कांग्रेस को छोड़कर सभी पार्टियों के प्रत्याशी पिछड़ी जाति से आते हैं। ऐसे में क्षेत्र का मुस्लिम वोटर निर्णायक की भूमिका में आ गया है। विगत चुनाव में कुलदीप सिंह सेंगर ने समाजवादी पार्टी के बदलू खां को हराया था। तीसरे नंबर पर बसपा थी। सपा से बदलू खां को टिकट न मिलने से मुस्लिम वर्ग में नाराजगी है। वहीं भाजपा से कुलदीप सिंह सेंगर के परिवार से टिकट न मिलने के कारण क्षेत्र का क्षत्रिय आक्रोशित है। जिनकी नाराजगी सोशल मीडिया पर खुलकर सामने आ रही है। सुरेश पाल का अपराधिक आंकड़ा भी चर्चा का विषय बना हुआ है।

गौरतलब है प्रदेश में आठ विधानसभा की सीटें रिक्त चल रही थी। निर्वाचन आयोग 7 सीटों पर चुनाव करा रहा है। जिनमें अमरोहा की नौगांवा सादात, बुलंदशहर की सदर, फिरोजाबाद की टूंडला, कानपुर की घाटमपुर, जौनपुर की मल्हनी, देवरिया की सदर सीट पर चुनाव करा रहा है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह भी मुख्यमंत्री के साथ चुनावी जनसभा को संबोधित करेंगे। सभी पार्टियों के दिग्गज नेता पार्टी प्रत्याशी के समर्थन में चुनावी जनसभा को संबोधित कर चुके हैं। लेकिन मतदाताओं की चुप्पी से राजनीतिक विशेषज्ञ बी अचंभित है। ऊंट किस करवट बैठता है। यह 3 दिसंबर के बाद पता चलेगा।

Narendra Awasthi
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