कोर्ट के फैसले के बाद शिक्षामित्रों ने योगी सरकार के खिलाफ लिया यह बड़ा फैसला

कोर्ट के फैसले के बाद शिक्षामित्रों ने योगी सरकार के खिलाफ लिया यह बड़ा फैसला
Shiksha Mitra

Shatrudhan Gupta | Updated: 17 Nov 2017, 05:51:23 PM (IST) Lucknow, Uttar Pradesh, India

शिक्षामित्रों ने एक बार फिर प्रदेश सरकार के शिक्षा विभाग पर बड़ा आरोप लगाया है।

उन्नाव. प्रदेश सरकार के असयोगात्मक रवैये से नाराज चल रहे प्रदेश के शिक्षामित्रों ने एक बार फिर प्रदेश सरकार के शिक्षा विभाग पर बड़ा आरोप लगाया है। शिक्षामित्र संगठन का आरोप है कि अवकाश से ज्यादा मानदेय की कटौती बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय द्वारा की जा रही है। शिक्षामित्रों का एरियल और बेसिक शिक्षा से शिक्षामित्रों का मानदेय नहीं आया है। शिक्षामित्रों ने बीएसए कार्यालय द्वारा की जा रही अनियमितताओं और अपनी आगे की रणनीति बनाने के उद्देश्य से स्थानीय निराला पार्क में आए एक बैठक कर चर्चा की। पदाधिकारी स्तर की इस बैठक में वक्ताओं ने राज्य सरकार के खिलाफ जमकर जहर उगला। इस मौके पर संगठन के पदाधिकारी व शिक्षकगण मौजूद थे।

सुप्रीम कोर्ट से जरूर मिलेगा न्याय

बैठक को संबोधित करते हुए समायोजित और गैर समायोजित शिक्षामित्र संगठन के जिला अध्यक्ष सुधाकर तिवारी ने बताया कि जनपद में लगभग सभी शिक्षकों के मानदेय मे ज्यादा की कटौती बेसिक शिक्षा कार्यालय द्वारा की जा रही है, जिससे शिक्षा मित्रों के सामने काफी परेशानी आ रही है। उन्होंने बताया कि एरियर का भुगतान नहीं किया गया है। इस संबंध में बेसिक शिक्षा अधिकारी से बातचीत कर आ रही परेशानियों के समाधान की मांग की जाएगी। उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट में डाली गई पुनर्विचार याचिका पर संगठन मजबूती के साथ पैरवी कर रहा है। उन्हें पूरा विश्वास है कि सुप्रीम कोर्ट से न्याय जरूर मिलेगा।

समायोजित होने के बाद शिक्षक अयोग्य कैसे हुआ

बैठक को संबोधित करते हुए समायोजित और गैर समायोजित शिक्षामित्र संगठन के जिला अध्यक्ष सुधाकर तिवारी ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद 1,72,000 शिक्षा मित्र आज सड़क पर आ गया है। उन्होंने राज्य शासन से मांग की कि कोर्ट के निर्णय के पूर्व हम लोग जिस प्रकार सहायक शिक्षक के पद पर समायोजित थे, उसी पद पर बनाए रखा जाए। जिससे शिक्षा की गुणवत्ता पर कोई असर ना पड़े।

्योगी सरकार ने नहीं उठाया कोई भी ठोस कदम

उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के वर्तमान निर्णय में बताया जा रहा है कि हम लोग अयोग्य हैं, फिर 35 सो रुपए में शिक्षामित्र गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा कैसे दे सकता है, जो शिक्षक विगत कई वर्षों से लगातार गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दे रहा था। उन्होंने कहा कि शिक्षक समायोजित होने के बाद अयोग्य कैसे हो गया। उन्होंने बताया कि शासन का कोई भी ठोस कदम शिक्षामित्रों के पक्ष में नहीं आया है, जिससे शिक्षा मित्र दर-दर की ठोकरे खा रहा है। बैठक को दीप नारायण त्रिपाठी ने भी संबोधित किया। इस मौके पर कुलदीप शुक्ला, ज्ञान, रामेंद्र, राजपाल, गीता, अमित, देव प्रकाश, दिनेश यादव, वीरपाल, निर्भय सिंह यादव, सुमित यादव, राम नरेश यादव, माया देवी, सुधा श्रीवास्तव, सरस्वती संजू यादव सहित बड़ी संख्या में शिक्षा मित्र मौजूद थे।

 

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