काशी विश्वनाथ और ज्ञानवापी मस्जिद मामले में कोर्ट का बड़ा फैसला, भारतीय पुरातात्विक सर्वेक्षण करेगा जांच

- काशी विश्वनाथ मंदिर (Kashi Vishwanath Mandir) और ज्ञानवापी मस्जिद (Gyanvapi Masjid) मामला

- सर्वेक्षण का सारा खर्च उठाएगी सरकार

- श्रीकृष्ण विराजमान मामले की सुनवाई अब 22 अप्रेल को करेगा मथुरा कोर्ट

पत्रिका न्यूज नेटवर्क

वाराणसी. काशी विश्वनाथ मंदिर (Kashi Vishwanath Mandir) और ज्ञानवापी मस्जिद (Gyanvapi Masjid) मामले में गुरुवार को कोर्ट का बड़ा फैसला आया। कोर्ट ने भारतीय पुरातात्विक सर्वेक्षण (एएसआई) को मामले में जांच करने की मंजूरी दे दी है। साथ ही जांच का खर्च भी राज्य सरकार उठाएगी। कोर्ट ने आदेश में कहा है कि 5 लोगों की कमेटी बनाई जाए और खुदाई की जाए। कमेटी में 2 अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को भी रखा जाए। आपको बता दें कि वाराणसी फार्स्ट ट्रैक कोर्ट में मामले को लेकर बहस चल रही थी।

 

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कोर्ट ने सुनाया फैसला

दरअसल श्री काशी विश्वनाथ मंदिर और ज्ञानवापी मस्जिद मामले में 2019 दिसंबर से पुरातात्विक सर्वेक्षण कराने को लेकर कोर्ट में बहस चल रही थी। वाराणसी फार्स्ट ट्रैक कोर्ट के जज आशुतोष तिवारी ने काशी विश्वनाथ मंदिर और ज्ञानवापी मस्जिद मामले में अहम फैसला सुनाया। वाराणसी फार्स्ट ट्रैक कोर्ट के जज आशुतोष तिवारी ने सर्वे कराकर आख्या प्रस्तुत करने का आदेश दिया है। आपको हता दें कि दिसंबर 2019 में अधिवक्ता विजय शंकर रस्तोगी ने सिविल जज की अदालत में स्वयंभु ज्योतिर्लिंग भगवान विश्वेश्वर की ओर से एक याचिका दायर की थी, जिसमें एएसआई द्वारा संपूर्ण ज्ञानवापी परिसर का सर्वेक्षण करने का अनुरोध किया गया था। उन्होंने स्वयंभु ज्योतिर्लिंग भगवान विश्वेश्वर के 'वाद मित्र' के रूप में याचिका दायर की थी। इसके बाद जनवरी 2020 में अंजुमन इंतजामिया मस्जिद समिति ने ज्ञानवापी मस्जिद और परिसर का एएसआई द्वारा सर्वेक्षण कराए जाने की मांग पर प्रतिवाद दाखिल किया। पहली बार 1991 में वाराणसी सिविल कोर्ट में स्वयंभु ज्योतिर्लिंग भगवान विश्वेश्वर की ओर से ज्ञानवापी में पूजा की अनुमति के लिए याचिका दायर की गई थी।

 

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ये था दावा

याचिकाकर्ता ने दावा किया था कि काशी विश्वनाथ मंदिर का निर्माण लगभग 2,050 साल पहले महाराजा विक्रमादित्य ने करवाया था, लेकिन मुगल सम्राट औरंगजेब ने सन 1664 में मंदिर को नष्ट कर दिया था। याचिकाकर्ता ने दावा किया कि इसके अवशेषों का इस्तेमाल मस्जिद बनाने के लिए किया था, जिसे मंदिर भूमि पर निर्मित ज्ञानवापी मस्जिद के रूप में जाना जाता है। याचिकाकर्ता ने अदालत से मंदिर की जमीन से मस्जिद को हटाने का निर्देश जारी करने और मंदिर ट्रस्ट को अपना कब्जा वापस देने का अनुरोध किया था।

 

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22 अप्रेल को श्रीकृष्ण विराजमान मामले की सुनवाई

वश्विक महामारी कोरोना संक्रमण की वजह से ही मथुरा की अदालत में श्रीकृष्ण विराजमान की याचिका की सुनवाई के लिए नई तारीख दी गई। मथुरा कोर्ट ने आगामी 22 अप्रैल को सुनवाई की नई तारीख दी है। मामले में बिना सुनवाई अगली तारीख मिल जाने के वजह से याचिकाकर्ता विष्णु जैन मायूस काफी दिखाई दिए। आपको बता दें कि मथुरा कोर्ट में श्रीकृष्ण विराजमान की ओर से याचिका दाखिल की गई है, जिसमें कहा गया है कि जिस जगह मुगल बादशाह औरंगजेब के शासनकाल में शाही ईदगाह मस्जिद बनाई गई, वह पौराणिक स्थल है। इसी स्थान पर वह ऐतिहासिक कारागार है, जहां भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था। याचिकाकर्ता ने यह दलील भी दी है कि इस स्थान को पहले केशव देवजी का टीला के नाम से जाना जाता था। याचिका में श्रीकृष्ण जन्मभूमि की 13.37 एकड़ जमीन पर स्वामित्व दिलाने की भी मांग की गई है। इसी मामले की सुनवाई अब मथुरा कोर्ट 22 अप्रैल को करेगा।

 

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नितिन श्रीवास्तव
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