दिल्ली पहुचा संकट मोचन संगीत समारोह और सुरगंगा म्यूजिक कंसर्ट विवाद

काशी की सांस्कृतिक विरासत संकट मोचन संगीत समारोह की ताऱीखों पर ही यूनेस्को के सहयोग से बनारस में हो रहा है सुर गंगा म्यूजिक कंसर्ट

डॉ. अजय कृष्ण चतुर्वेदी



वाराणसी.
देश की सांस्कृतिक राजधानी काशी की सांस्कृति विरासत पर मंडरा रहे खतरे की गूंज देश की राजधानी दिल्ली तक पहुंच गई है। इस सांस्कृतिक विरासत की रक्षा के लिए सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ट अधिवक्ता और जनतादल यूनाइटेड के नेता आगे आए हैं। उन्होंने तय किया है कि वे इस मुद्दे पर यूनेस्को की भारतीय शाखा को मेमोरेंडम देंगे। उन्हें समझाएंगे कि किसी नई सुखद परंपरा को शुरू करने के लिए वर्षों की परंपरा को नष्ट नही किया जाता।



बता दें कि यूनेस्को के सगयोग से वाराणसी नगर निगम और स्थाऩीय एक टीवी चैनल ने काशी में 43 दिन का एक नया संगीत कार्यक्रम आयोजित करने का निर्णय किया है। यह आयोजन 18 अप्रैल से 30 मई तक चलना है। इस कार्यक्रम के स्थानीय आयोजकों के अनुसार इस सांस्कृतिक आयोजन, 'सुर गंगा' में प्रख्यात पार्श्व गायिका आशा भोंसले सहित कई नामचीन कलाकार काशी में अपनी विधा का प्रदर्शन करेंगे। निःसंदेह काशी के संगीत प्रेमियों के लिए यह अनोखा मौका होगा जब वे राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय स्तर के संगीतज्ञों से रू-ब-रू होंगे। लेकिन इस आयोजन की तिथि काशी की प्राचीन सांस्कृतिक विरासत, 'संकट मोचन संगीत समारोह' की तिथि से टकरा रही है। बता दें कि संकट मोचन संगीत समारोह हनुमन जयंती 15 अप्रैल से संकट मोचन मंदिर परिसर में शुरू हो रहा है जो 20 अप्रैल तक चलेगा। यहां यह भी बताना जरूरी है कि संकट मोचन संगीत समारोह काशी का विशिष्ट संगीत समारोह है जिसमें देश ही नहीं विदेश के ख्यातिलब्ध संगीतज्ञों का जमावड़ा होता है और यह कार्यक्रम हनुमान जयंती से ही हर साल आरंभ होता है। पिछले दो सालों से इस समारोह के विशिष्ट कलाकार अंतर्राष्ट्रीय गजल गायक उस्ताद गुलाम अली रहे हैं। इसके अलावा पंडित जसराज, पंडित हरि प्रसाद चौरसिया जैसे कलाकार प्रभु श्री राम के अनन्य भक्त हनुमान जी के दरबार में अपनी स्वरांजलि अर्पित कर चुके हैं। इस हनुमत दरबार में कभी भारत रत्न सहनाई उस्ताद बिस्मिल्लाह खां, तबला बादक किशन महाराज अपनी प्रस्तुति देना अपना सौभाग्य मानते रहे।


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ऐसे में अब इस पांच दिवसीय संकट मोचन संगीत समारोह के दौरान ही यूनेस्को द्वारा सुरगंगा कार्यक्रम आयोजित होने से काशी के अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त संकट मोचन संगीत समारोह पर खतरा पैदा होने की आशंका पैदा हो गई है। स्थानीय स्तर पर संकट मोचन संगीत समारोह से जुड़े लोगों ने काफी प्रयास किया कि काशी के संगीत रसिकों को 18 नहीं बल्कि 15 अप्रैल से 30 मई यानी डेढ़ महीने तक संगीत का भरपूर लुत्फ उठाने का मौका मिले। लेकिन बात नहीं बनी। लोगों का प्रयास था कि अगर संकट मोचन संगीत समारोह की तिथियों को प्रभावित किए बगैर नया कार्यक्रम शुरू हो ताकि दोनों ही आयोजन में राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय कलाकारों की उपस्थिति हो जिसका रस काशी के रसिकों को मिल के। लेकिन बात नहीं बन रही थी। इसी बीच काशी की सांस्कृतिक विरासत पर मंडरा रहे खतरे की आंच देश की राजधानी दिल्ली तक पहुंच गई। यह बताना कि इस कार्यक्रम से देश ही नहीं पूरी दुनिया का संगीत प्रेमी जुड़े हैं कार्यक्रम की तौहीन होगी। लिहाजा जब बात दिल्ली तक पहुंची तो लोग खुद आगे आए और कहा कि वो अपने स्तर से प्रयास करेंगे कि काशी की सांस्कृतिक थाती पर कोई आंच भी न आए और नई परंपरा का श्रीगणेश भी हो सके।




इस संबंध में जनता दल यूनाइटेड के राष्ट्रीय महासचिव अरुण श्रीवास्तव ने पत्रिका संवाददाता को फोन पर बताया कि वह करीब 10-15 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल के साथ सोमवार को यूनेस्को के आफिस जाएंगे। यूनेस्को के भारतीय कार्यालय के अधिकारियों को संकट मोचन संगीत समारोह की जानकारी देंगे। फिर उनसे आग्रह करेंगे कि इस प्राचीन परंपरा के साथ छेड़छाड़ किए बिना वो अपना संगीत कार्यक्रम आयोजित करें। उन्होंने बताया कि इस प्रतिनिधिमंडल में सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ  अधिवक्ता भी होंगे जिसमें राम जेठामलानी भी प्रमुख हैं।



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Ajay Chaturvedi
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