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जौ की फसल की कटाई शुरू, बम्पर पैदावार की है उम्मीद

– तापमान बढ़ते ही जयपुर ग्रामीण में शुरू हुई जौ की कटाई, 53 हजार हैक्टेयर में बोई गई फसल से बम्पर पैदावार की आस बस्सी. दिन का तापमान बढ़ते ही जयपुर ग्रामीण अंचल के खेतों में अब जौ की फसल पकने लग गई है और अब किसानों ने कटाई भी शुरू कर दी है। खेतों […]

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– तापमान बढ़ते ही जयपुर ग्रामीण में शुरू हुई जौ की कटाई, 53 हजार हैक्टेयर में बोई गई फसल से बम्पर पैदावार की आस

बस्सी. दिन का तापमान बढ़ते ही जयपुर ग्रामीण अंचल के खेतों में अब जौ की फसल पकने लग गई है और अब किसानों ने कटाई भी शुरू कर दी है। खेतों में लहलहाती सुनहरी बालियां इस बात का संकेत दे रही हैं, कि इस बार जौ की पैदावार उम्मीद से बेहतर रहेगी। मौसम की अनुकूलता, समय पर सिंचाई और संतुलित तापमान के कारण जौ की फसल मजबूत मानी जा रही है। किसानों के चेहरों पर राहत और संतोष साफ झलक रहा है।

जिले में इस वर्ष करीब 53 हजार हैक्टेयर क्षेत्र में जौ की बुवाई की गई थी। शुरुआती दौर में हल्की सर्दी और बाद में तेज धूप ने फसल को पर्याप्त सहारा दिया है। कृषि अधिकारियों ने बताया कि जौ की फसल कहीं पक कर तैयार हो गई तो कई जगह इसकी कटाई भी शुरू हो गई है। अगले सप्ताह तक अधिकांश किसान जौ की फसल की पूरी तरह से कटाई शुरू कर देंगे।

किसानों का कहना है कि इस बार मौसम ने साथ दिया। न ज्यादा पाला पड़ा और न ही असमय बारिश हुई। इससे जौ की फसल को नुकसान नहीं हुआ। समय पर खाद और पानी मिलने से पौधों की बढ़वार अच्छी रही। अब जब फसल पककर तैयार है तो लागत निकलने के साथ अच्छा मुनाफा मिलने की उम्मीद जगी है।

कृषि विभाग के अधिकारियों का भी मानना है कि इस बार जौ की उपज बेहतर रहेगी। जौ के साथ-साथ गेहूं, सरसों और चने की फसल भी अच्छी स्थिति में है।

जयपुर ग्रामीण जिले में इस बार कुल करीब 3 लाख 54 हजार 484 हैक्टेयर भूमि में रबी फसलों की बुवाई हुई है। इसमें सबसे अधिक क्षेत्र चने की है, जबकि गेहूं और जौ भी बड़े पैमाने पर बोए गए हैं। जौ की फसल को लेकर खास उत्साह इसलिए भी है, क्योंकि यह कम समय में तैयार होती है और मौसम की मार अपेक्षाकृत कम झेलती है।

फसल पूरी तरह सूखने के बाद ही कटाई और थ्रेसिंग कराएंगे, ताकि अनाज में नमी न रहे और गुणवत्ता बनी रहे।

कम समय व कम खर्च में होती है जौ की पैदावार::::

जिन इलाकों में सिंचाई के पानी की व्यवस्था कम है उन इलाकों में किसान गेहूं की बजाय की जौ की पैदावार करते हैं। पिछले तीन – चार साल से जौ का भाव भी अच्छा मिल रहा है। जौ की फसल गेहूं से कम समय एवं कम खर्च में हो पैदावार हो जाती है। बस्सी इलाके में जौ के दाने में गिरी भी अधिक होती है, इसकी बाहर भी मांग रहती है।