गत वर्ष के मुकाबले सौ से डेढ़ सौ रुपए मण सस्ता
– भरपेट मिलेगा गाय-भैंसों को चारा
बस्सी/दूधली. बस्सी, चाकसू एवं जमवारामगढ़ समेत पूरे जयपुर ग्रामीण में इस बार रबी के सीजन में गेहूं की बम्पर पैदावार होने से चारे के भाव गत वर्ष के मुकाबले सौ से डेढ़ सौ रुपए मण गिरने से पशुपालक खुश है, हालांकि चारे के भाव गिरने से किसान जरूर मायूस है। पशुपालकों को गत वर्ष साढ़े तीन सौ रुपए से चार सौ रुपए मण तक गेहूं का चारा खरीदना पड़ता था, तो इस बार 200-250 रुपए मण चारा आसानी से मिल रहा है।
पशुपालक मवेशियों को आसानी से भरपेट चारा खिला पाएंगे। हालांकि अभी तक चारे के दाम और भी गिरने का अनुमान है। अधिकांश पशुपालक किसान है, जिनके खेतों में गेहूं की बम्पर पैदावर हुई है, जिनको इस बार चारा खरीदने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी। बाहरी चारे की नहीं होगी खपत इस बार बस्सी, चाकसू एवं जमवारामग़ढ़उपखण्ड समेत पूरे जयपुर ग्रामीण इलाके में गेहूं की बम्पर पैदावार होने से किसानों के खेतों में चारे की खूब पैदावार हुई है। ऐेसे में पशुपालकों को यहीं पर गेहूं का आसानी से चारा मिल रहा है। ऐसे में पशुपालकों को बस्सी व तूंगा की टाल पर बाहर का चारा खरीदने की जरूरत नहीं पड़ेगी। पिछले वर्षों जब चारे की कम पैदवार हुई थी, तब टाल वाले दुकानदार पंजाब, हरियाणा व मध्य प्रदेश से चारा मंगवा कर बेच रहे थे।
चारे के भाव गिरने से किसान मायूस इधर, चारे की बम्पर पैदावार होने से इसकी डिमाण्ड भी कम हो गई है, ऐसे में किसानों को चारे के भाव गत वर्ष के मुकाबले कम मिल रहे हैं। किसानों का कहना था कि गत वर्षों जब चारे की टूट रहती थी, तो उनको गेहूं के चारे की ही नहीं बल्कि जौ के चारे के भी अच्छे दाम मिलते थे, लेकिन इस बार गेहूं का चारा अच्छा पैदा होने से पशुपालक जौ का चारा कतई नहीं खरीद रहे हैं। नहीं मिल रहे हैं मजदूर किसानों को इस बार गेहूं की फसल की कटाई के लिए आसानी से मजदूर नहीं मिल रहे हैं।
किसान कन्हैयालाल व श्रवण लाल ने बताया कि इस बार एक तो लावणी के लिए मजदूर नहीं मिल रहे हैं, दूसरा चारे के भी दाम कम मिल रहे हैं। जो मजदूर मिल रहे हैं, उनको गत वर्ष जहां प्रतिदिन की मजदूरी साढ़े तीन सौ रुपए दिए जा रहे थे, अबकी बार साढ़े चार सौ से पांच सौ रुपए तक दिए जा रहे हैं। बम्पर पैदावार का यह कारण इस वर्ष न केवल गेहूं की पैदावार बम्पर है, बल्कि जौ, सरसों एवं चने की भी बम्पर पैदावार हुई है, लेकिन पशुओं के लिए बढि़या चारा तो गेहूं की फसल का ही है। इस बार बरसात के मौसम में अच्छी बरसात होने से कुएं एवं बोरवेलों में पानी का स्तर बढ़ने से किसानों के खेतों में बम्पर पैदावार है। (कासं.)