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कोहरे का आगोस: सड़कों पर विजिबिलिटी कम, सड़कों पर रेंगते रहे वाहन

जयपुर ग्रामीण क्षेत्र के बस्सी, चाकसू, जमवारामगढ़ और आसपास के इलाकों में मंगलवार दोपहर 12 बजे तक घना कोहरे और शीतलहर ने जनजीवन को प्रभावित कर दिया।

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बस्सी. जयपुर ग्रामीण क्षेत्र के बस्सी, चाकसू, जमवारामगढ़ और आसपास के इलाकों में मंगलवार दोपहर 12 बजे तक घना कोहरे और शीतलहर ने जनजीवन को प्रभावित कर दिया। मंगलवार तकड़े से शुरू हुई सर्द हवाओं और घने कोहरे के कारण मंगलवार दोपहर 12 बजे तक पूरा क्षेत्र कोहरे की चादर में लिपटा रहा। इसका असर सड़कों और रेलमार्ग पर साफ दिखाई दिया, जिससे यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ और लोगों को कई तरह की कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।

सड़कों पर विजिबिलिटी का संकट:::::

घने कोहरे और शीतलहर के कारण जयपुर-आगरा, जयपुर-कोटा, मनोहरपुर-दौसा राष्ट्रीय राजमार्ग और जयपुर-गंगापुर स्टेट हाईवे पर विजिबिलिटी 20 मीटर तक रही। वाहनों की रफ्तार थम सी गई और कई स्थानों पर गाड़ियां रेंगते हुए दिखाई दीं। तड़के लगभग 3 बजे से शीतलहर का असर और भी तेज हो गया। इस दौरान सड़क पर वाहन चालकों को हैड लाइट्स जलाकर यात्रा करनी पड़ी, लेकिन फिर भी कम दृश्यता के कारण यात्रा जोखिम भरी बनी रही। कई स्थानों पर वाहन चालक गति धीमी करने के लिए मजबूर थे और कुछ जगहों पर वाहनों को रुकते हुए देखा गया।

मौसम विभाग ने इस मौसम की स्थिति को सामान्य से ज्यादा सर्द बताया और अधिकतम तापमान 17 डिग्री और न्यूनतम तापमान 6 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। सर्दी के कारण सड़कों पर यात्रा करना किसी चुनौती से कम नहीं था। कोहरे का असर अब रेल यातायात पर भी साफ नजर आ रहा था। जयपुर-दिल्ली रेलमार्ग पर ट्रेनों की गति धीमी हो गई, जिससे यात्रियों को खासा परेशानी का सामना करना पड़ा। कई ट्रेनें अपने निर्धारित समय से देरी से चलीं और कई यात्रियों को अतिरिक्त समय तक स्टेशन पर रुकना पड़ा। इससे रेल यात्रियों को काफी असुविधा हुई, और समय की किल्लत ने उनकी यात्रा को तनावपूर्ण बना दिया।

बाजार भी प्रभावित:::::

सर्दी और कोहरे के कारण बस्सी और आसपास के इलाकों में बाजारों के खुलने में भी देरी हुई। आमतौर पर जल्दी खुलने वाले बाजार इस दिन देर से खुले, जिससे व्यापारियों को भी असुविधा का सामना करना पड़ा। लोग सर्दी से बचने के लिए अलाव के पास खड़े होकर तापते दिखाई दिए। बच्चों को स्कूल जाने में परेशानी हुई, क्योंकि ठंड की वजह से वे ठिठुरते हुए स्कूल पहुंचे। मजदूरों को भी काम पर जाने में कठिनाई का सामना करना पड़ा, क्योंकि सड़क पर यात्रा करना जोखिम से भरा था।