कोरोना संक्रमित बेटे को घर में रखा दूसरे दिन हो गई पिता की मौत

कोरोना संक्रमण के बढ़ते खतरे के बीच स्वास्थ्य विभाग लापरवाही पर लापरवाही बरत रहा है और ऐसा ही एक मामला एक बार फिर सामने आया है...

By: Shailendra Sharma

Updated: 03 Aug 2020, 12:09 AM IST

विदिशा. विदिशा जिले के लटेरी में स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की लापरवाही का एक बड़ा मामला सामने आया है। यहां पहले तो कोरोना संक्रमित एक मरीज को स्वास्थ्य विभाग के अमले ने पहले तो कोविड सेंटर में नहीं भेजा और घर पर ही होम आइसोलेट कर दिया और अब जब दूसरे ही दिन कोरोना संक्रमित मरीज के पिता की मौत हुई तो उनका भी कोरोना सैंपल नहीं लिया और अंतिम संस्कार करा दिया।

शनिवार को आई थी बेटे की रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव
शनिवार को लटेरी में दो लोगों की कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी जिनमें किराना व्यापारी और किराना व्यापार संघ के अध्यक्ष रोहित अग्रवाल भी शामिल थे। रोहित की रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद भी स्वास्थ्य विभाग के अमले या प्रशासनिक अधिकारी ने उन्हें कोविड केयर सेंटर में भर्ती होने के लिए नहीं भेजा। रोहित को घर में ही होम क्वारंटीन रहने के लिए कहा गया। रविवार को रोहित के पिता रमेश चंद्र अग्रवाल की तबीयत अचानक बिगड़ी और उनकी मौत हो गई। परिजन का आरोप है कि पिता की तबीयत बिगड़ने के बाद उन्होंने बार-बार स्वास्थ्य अमले को फोन किया। मृतक के परिजन रूपेश अग्रवाल का आरोप है कि सुबह 11 बजे से लटेरी बीएमओ डॉ. नरेश बघेल और एसडीएम तन्मय वर्मा को फोन लगा रहे थे, लेकिन प्रशासन ने किसी तरह की मदद उपलब्ध नहीं कराई और न तो एंबुलेंस आई और न ही कोई डॉक्टर घर पहुंचा।

 

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परिजन का आरोप नहीं मिली मदद
स्वास्थ्य विभाग की एक और लापरवाही उस वक्त सामने आई जब कोरोना संक्रमित बेटे के पिता की मौत के बाद भी उनका सैंपल नहीं लिया और उनका अंतिम संस्कार करा दिया। मृतक के अंतिम संस्कार में पंद्रह लोग शामिल हुए थे जिन्हें प्रशासनिक अधिकारियों ने पीपीई किट पहनाकर अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए भेजा। इ घटना के बाद से मृतक के परिजनों, समाज के लोगों औऱ क्षेत्रवासियों में जमकर नाराजगी है जिन्होंने एसडीएम, पुलिस और बीएमओ के खिलाफ जमकर नारेबाजी भी की। नारेबाजी होने की खबर लगते ही प्रशासनिक अमला मौके पर पहुंचा जिसे भी लोगों ने जमकर खरी-खोटी सुनाई

 

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नहीं लिया गया मृतक का सैंपल
रोहित अग्रवाल खुद कोरोना पॉजिटिव हैं, वे उसी घर में आइसोलेशन में हैं, जिसमें उनके पिता रहते थे। पिता की मौत हो जाती है, लेकिन उनका सैंपल नहीं लिया जाता। तहसीलदार अजय शर्मा कहते हैं कि परिजन सैंपल के लिए तैयार नहीं हुए। एसडीएम कहते हैं कि मौत किसी और बीमारी से हुई है। सवाल यह है कि क्या प्रशासन और नियम लोगों के कहने से चलेंगे? क्या बिना सैंपल लिए और जांच के ही एसडीएम तय करेंगे कि किसी की मौत कोरोना से हुई है या किसी और बीमारी से। फिर यह भी महत्वपूर्ण बात है कि कोविड केयर सेंटर बनाने के बावजूद क्यों लटेरी के संक्रमितों को होम आइसोलेशन में रखा जा रहा है, क्यों नहीं उन्हें कोविड केयर सेंटर में उपचार मुहैया नहीं कराया जा रहा है।

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