इन आंखों के असर से कैसे बचूंगी मैं

Sunil Sharma

Publish: May, 18 2018 03:28:23 PM (IST)

Work & Life
इन आंखों के असर से कैसे बचूंगी मैं

बेशर्म नस्लों की कारगुजारियों का गंदला इतिहास

लाखों प्रकाशवर्ष दूर टिमटिमाते तारे
इन काले चमकदार कैमरों में
दर्ज हो रहा है परत दर परत
हमारी बेशर्म नस्लों की कारगुजारियों का गंदला इतिहास
ये सफेद काली आंखें
कोई सवाल नहीं पूछ्तीं
कोई शिकायत भी नहीं करतीं
किसी को तलाश भी नहीं करतीं

ये सिर्फ देखती हैं चुपचाप
और फिर भेदती हैं अंदर तक हमारी जमी जमाई जिंदगियों के सुकून को
ये आंखें तमाम अनाथ सीरियाई बच्चों की आंखों से मेल खाती हैं
पेशावरी बच्चों की भून दी गई आंखें भी तो ऐसी ही रही होंगी
क्या कालाहांडी के अकाल से मरते बच्चों की आंखों से कोई अलग हैं ये आंखें

इन आंखों के असर से कैसे बचूंगी मैं
इनकी धार से चिर गए अपने कलेजे को कैसे सियूंगी मैं
बचपन को निगल जाने को बेताब जमाने के आगे
सरेंडर से पहले की फड़फड़ाहट से भरे गोल गोल चक्कर काटते पंछी जैसी या फिर
अंधेरों में यात्रा करते करते अनगिनत शापित आकाशीय पिंडों की तरह
किसी बिग बैंग के इंतजार में किस पृथ्वी की परिक्रमा करती हैं ये आंखें

मुझे इन आंखों से डर लगता है
मुझे उस विस्फोट की कल्पित आवाजों से डर लगता है
मुझे आकाश में टूटकर बेआवाज़ बिखर रहे तारों की आखिरी चमक से डर लगता है
मुझे कई सौ प्रकाश वर्ष पहले मर चुके तारों के हाहाकार से डर लगता है
देखो हमारे सिर पर मर चुके अनंत अनंत तारे कैसे टिमटिमा रहे हैं
मुझे इस भ्रम भरी दिपदिपाहट से डर लगता है
मुझे नींद में भी इन आंखों से डर लगता है

- नीलिमा चौहान
(ब्लॉग से साभार)

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