किसी भी कार्यालय अथवा संस्था में अगर उसका विभागाध्यक्ष नई उम्र का आ जाए तो क्या उसके बुजुर्ग अधीनस्थ उसकी बात नहीं मानेंगे। उसे बच्चे की तरह ट्विट करेंगे। इसका सीधा सा उत्तर है नहीं। बॉस बॉस होता है, चाहे वह जितनी भी छोटी उम्र को भले क्यों न हो। इसी प्रकार की गलती हुमायुं के खास वजीर बैरमखां ने की थी। अकबर को वे हमेशा बच्चा ही मानते रहे। चाचा बैरम खां की इस सोच से अकबर बहुत ही उद्वैलित होता गया। ऐसा ही कुछ यूपी में होता दिखा। बेटे ने पिता और चाचा से बगावत के लहजे में जो किया वह सर्व विदित है, लेकिन किसी ने यह जानने की काशिश की कि आखिर वह क्या चाहता है। पत्रकारों ने भी सवाल किए तो परिवार को लड़ने वाले।