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घुड़सवारी का बढ़ रहा लोगों में शौक, बच्चों में भी रुचि जागी

वडोदरा पुलिस सिखा रही तीन महीने में घुड़सवारी लोग पालने लगे हैं घोड़े

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घुड़सवारी का बढ़ रहा लोगों में शौक, बच्चों में भी रुचि जागी

घुड़सवारी का बढ़ रहा लोगों में शौक, बच्चों में भी रुचि जागी

राजेश भटनागर

अहमदाबाद. गुजरात के कुछेक शहरों में लोगों में घुड़सवारी को शौक बढ़ रहा है। इन दिनों वडोदरा शहर पुलिस की ओर से घुड़सवारी का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
वडोदरा के अंकोडिया गांव निवासी कौशिक व्यास तीन घोडों को पाल रहे हैं। उनका पुत्र रुद्र इन दिनों वडोदरा पुलिस की ओर से आयोजित तीन महीने के प्रशिक्षण में घुड़़सवारी के गुर सीख रहा है। कौशिक के अनुसार कई लोग प्रशिक्षण लेने के बाद निजी तौर पर घुड़सवारी का प्रशिक्षण देने की शुरुआत कर
चुके हैं।
वडोदरा के ही रामानंद गणदेवीकर भी पुलिस से घुडसवारी का प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद अब प्रशिक्षण दे रहे हैं। रामानंद के अनुसार करीब 15 वर्ष पहले थोड़ी-बहुत घुड़सवारी सीखी थी लेकिन शहर पुलिस की ओर से शुरू किए प्रशिक्षण का पता लगने पर फिर से रूचि जागी और प्रारंभिक प्रशिक्षण लिया। उनके पास जगह होने के चलते प्रशिक्षण लेकर मारवाड़ी नस्ल की दो घोडिय़ां खरीदी। उनका शौक पूरा करने में प्रशिक्षण उपयोगी साबित हो रहा है।
35 लोग ले रहे प्रशिक्षण, 6 घोड़े उपलब्ध
पुलिस व लोगों को एक-दूसरे के पूरक बनाने के लिए संचालित किए जा रहे सुरक्षा सेतु के तहत प्रतापनगर स्थित वडोदरा शहर पुलिस के मुख्यालय में अश्व प्रशिक्षण स्कूल (अश्व तालीम शाला) में चौथे चरण में 35 लोग घुड़सवारी का प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। इससे पहले, तीन चरणों में 92 लोग घुडसवारी सीख चुके हैं। वडोदरा शहर पुलिस की माउंटेड शाखा की ओर से शहर पुलिस आयुक्त डॉ. शमशेरसिंह के प्रोत्साहन से लोगों को घुड़सवारी का प्रशिक्षण शुरू किया गया। फिलहाल आवंटित 11 की जगह 6 घोड़े उपलब्ध हैं। इनमें काठियावाड़ी, मारवाड़ी व थ्रो ब्रीड के अरबी नस्ल के घोड़े हैं। इन्हें जेस, पूजा, डायमंड, शेरा, चांदनी, स्ट्रोम नाम दिया है।
निजी होर्स राइडिंग ट्रेनिंग संस्थाओं में घुड़सवारी के महंगे प्रशिक्षण के मुकाबले पुलिस की ओर से तीन महीने के बेसिक प्रशिक्षण की फीस कम है। युवक व युवतियां भी इसका उत्साहपूर्वक प्रशिक्षण ले रही हैं।

चेतक घोड़ा व माणकी घोड़ी प्रसिद्ध

भारतीय इतिहास में महाराणा प्रताप का घोड़ा गुजरात का चेतक और धर्म इतिहास में सहजानंद स्वामी की घोड़ी माणकी का नाम प्रसिद्ध है। वडोदरा के पूर्व गायकवाड़ी शासकों का शासन मंत्र था जीन घर, जीन तख्त। अर्थात जन कल्याण के लिए घोड़े पालने के लिए जीन यानी घर और वही राज सिंहासन।

10 घुड़सवार पुलिसकर्मी दे रहे प्रशिक्षण

माउंटेड शाखा के 10 घुड़सवार पुलिसकर्मी प्रशिक्षणार्थियों को प्रशिक्षण दे रहे हैं। प्राथमिक प्रशिक्षण में घोड़े पर बैठने, उतरने, नियंत्रण, विविध प्रकार की चाल से घोड़े को दौड़ाने, देखभाल, स्नान खुराक आदि की जानकारी दी जाती है। सुरक्षा सेतु की यह पहल लोगों को पसंद आ रही है। घनश्यामसिंह एन. जाडेजा, उप निरीक्षक, माउंटेड शाखा, वडोदरा शहर पुलिस।

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