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हाथों में केसरिया, जुबां पर ‘जय भवानी’

सिर पर साफा, राजपूताना वेशभूषा, हाथों में केसरिया और जुबां पर जय भवानी के जयकारे। रविवार को यह नजारा था गांधीनगर के रामकथा मैदान में श्री राजपूत करणी

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In the hands of 'Jai Bhavani' on Kesaria, Zuban

In the hands of 'Jai Bhavani' on Kesaria, Zuban

अहमदाबाद।सिर पर साफा, राजपूताना वेशभूषा, हाथों में केसरिया और जुबां पर जय भवानी के जयकारे। रविवार को यह नजारा था गांधीनगर के रामकथा मैदान में श्री राजपूत करणी सेना के बैनर तले रविवार को आयोजित राजपूत-क्षत्रिय स्वाभिमान सम्मेलन का। सम्मेलन में न सिर्फ अहमदाबाद बल्कि गुजरात के सुरेन्द्रनगर, महेसाणा, कच्छ, वडोदरा के अलावा राजस्थान और मध्य प्रदेश से राजपूत युवा उमड़ पड़े। सुबह से ही गांधीनगर आने वाली सडक़ों पर मोटरसाइकिल और कारों पर केसरिया झंडा लहराते और सिर पर साफा बांधे राजपूत युवक आते नजर आ रहे थे, जो रैली के स्वरूप में गांधीनगर के रामकथा मैदान में पहुंच रहे थे।

जो भी काफिला वहां पहुंचता ‘जय भवानी’, जय राजपूताना के जयकारों से गूंज उठता है, जो सम्मेलन में नया जोश बढ़ा रहा था तो क्षत्राणियां भी परंपरागत वेशभूषा में सम्मेलन में पहुंंची। हालांकि सम्मेलन में लोगों के लिए कुर्सियां लगाई गई थीं, लेकिन लोग इस कदर उमड़े कि कुर्सियां भी कम पड़ गए। हालात यह थे कि लोग जमीन पर बैठ गए जो उनकी राजपूत समाज के प्रति समर्पण भावना को दिखा रहा था। उनके चेहरे पर साफ झलक रहा था कि वे किसी भी हालात में अपने इतिहास से छेड़छाड़ को बर्दाश्त करना चाहते हैं।

‘लोग आत्महत्या कैसे कर सकते हैं’ संदेश लिखने वाले ने की आत्महत्या!

लोग आत्महत्या कैसे कर सकते हैं का संदेश लिखने वाले एक युवक ने गुरुवार को खुद अपने कार्यालय में आत्महत्या कर ली। ऑफिस में शव मिलने से उसके परिजन व मित्र सकते में हैं। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

जानकारी के अनुसार वाघोडिया रोड पर क्रिस्टल स्कूल के समीप कृष्णकुंज सोसायटी में रहने वाला 25 वर्षीय मिनांक रमेशभाई परमार नामक युवक प्रारम्भ कॉम्प्लेक्स स्थित वीआईपी इवेंट मैनेजमेंट कंपनी में नौकरी करता था। वह दोपहर में घर से निकलते समय अपनी मां के दुपट्टे को वह जेब में रखकर कार्यालय पहुंचा था।

गुरुवार को उसका अवकाश था। कारण कि बुधवार देर रात तक उसने कंपनी में काम किया था। कंपनी के संचालक सागर शाह ने गुरुवार को उसे अवकाश दे दिया था। गुरुवार को उन्हें अहमदाबाद जाना था, इस लिए उन्होंने कार्यालय बंद रखा था। सागर शाह ने गुरुवार को कई बार उसे फोन किया लेकिन मोबाइल की घंटी बजती रही और किसी ने उठाया नहीं। उन्होंने अपने मित्र दीपक के माध्यम से जांच कराई। दीपक जब कार्यालय पहुंचे तो उसका शटर आधा खुला हुआ था।

दीपक उसे खोलकर जब कार्यालय में घुसे तो मिनांक का शव लटका हुआ था। दीपक ने इसकी जानकारी फोन से सागर शाह को दी। जानकारी मिलते ही वह स्तब्ध रह गए। पुलिस ने दुर्घटनावश मौत का मामला दर्ज किया है। मिनांक के नजदीकी मित्रों का कहना है कि उसकी बहन का पति के साथ अनबन चल रहा था और छह महीने से वह मायके में ही रहती थी।

इस दौरान उसने कई बार उसके ससुराल वालों से सम्पर्क किया, लेकिन वे उसकी बहन को ले नहीं गए। इससे वह दुखी रहता था। गत दिनों उसके एक मित्र ने आत्महत्या कर ली थी। उस समय मिनांक ने कहा था कि ‘पता नहीं लोग किस तरह से आत्महत्या कर लेते हैं’। मिनांक के पिता पुलिस में नौकरी करते थे और दस वर्ष पूर्व उनका निधन हो गया था। अब बेटे की मौत के बाद उसकी मां बेसहारा हो गई हैं।

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