patrika sting- डॉक्टर व मेडिकल स्टोर संचालक कुछ यूं करते हैं फर्जीवाड़ा,दवा ही नहीं यह भी करवा रहे दुकानों पर उपलब्ध

सरकारी दस्तावेजों को भले ही अहम प्रमाण माना जाता हो, लेकिन शहर में किस तरह प्रशासन की आंखों में धूल झौंक कर फर्जीवाड़ा कर मेडिकल सर्टिफिकेट जारी

By: सोनम

Published: 09 Dec 2017, 02:02 PM IST

सोनम राणावत/सुनिल जैन / अजमेर . .सरकारी दस्तावेजों को भले ही अहम प्रमाण माना जाता हो, लेकिन शहर में किस तरह प्रशासन की आंखों में धूल झौंक कर फर्जीवाड़ा कर मेडिकल सर्टिफिकेट जारी किए जा रहे हैं। इसका खुलासा राजस्थान पत्रिका के स्टिंग ऑपरेशन में हुआ है। शहर में कई मेडिकल स्टोर ऐसे हैं, जहां मेडिकल सर्टिफिकेट भी बिक रहे हैं। खास बात यह है कि जो मेडिकल सर्टिफिकेट दवा की दुकानों से मिल रहे हैं, उन्हें सरकारी चिकित्सक ही बिना कोई जांच पड़ताल किए जारी कर रहे हैं। हमारे संवाददाता सुनील जैन और सोनम राणावत ने शुक्रवार को इस स्टिंग को अंजाम दिया तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए।



 

 

 

medical stores making fake medical certificate in doctors guidance

बैकडेट में भी ले सकते हैं प्रमाण

अगर आप बीमार नहीं हैं तो भी इन मेडिकल स्टोर से पैसे देकर अपना मेडिकल सर्टिफिकेट आसानी से बनवा सकते हैं। इनके पास रोगी को भी जाने की जरूरत नहीं है। इतना ही नहीं आप बैकडेट में भी सर्टिफिकेट जारी करा सकते हैं। मेडिकल स्टोर संचालकों और सरकारी चिकित्सकों की मिलीभगत से आप चाहे जितने दिनों का मेडिकल सर्टिफिकेट ले सकते हैं।

एक ही चिकित्सक ने दे दिए तीन सर्टिफिकेट

पत्रिका टीम ने स्टेशन रोड व नगरा स्थित मेडिकल शॉप से पैसे देकर मेडिकल सर्टिफिकेट मांगे। टीम ने अलग-अलग समय में तीन प्रमाण पत्र अलग-अलग नाम से बनवाने के लिए पैसे दिए, लेकिन जब तीनों प्रमाण पत्र मिले तो तीनों एक ही चिकित्सक की ओर से जारी किए गए थे। इन प्रमाण पत्रों पर राजकीय आयुर्वेद शल्य चल चिकित्सा इकाई के प्रभारी डॉ. सुधाकर मिश्र के हस्ताक्षर हैं।

medical stores making fake medical certificate in doctors guidance

रोगी हस्ताक्षर भी नहीं

प्रमाण पत्र पर रोगी के हस्ताक्षर का स्थान भी है, लेकिन पत्रिका टीम को जारी किए गए प्रमाण पत्रों पर रोगी के हस्ताक्षर भी नहीं करवाए गए। यहां तक कि छह व सात दिसम्बर के लिए अलग-अलग नाम से जारी प्रमाण पत्र पर क्रमांक संख्या 5727 ही दी गई है। रोगी को भी चिकित्सक के पास जाने की जरूरत नहीं पड़ी।

medical stores making fake medical certificate in doctors guidance

यूं हुआ खुलासा केस-1

एक घंटे बाद ही दे दिए दो प्रमाण पत्र
पत्रिका टीम रेलवे स्टेशन रोड स्थित विजय आयुर्वेदिक स्टोर पर पहुंची। स्टोर पर बैठे व्यक्ति से कहा गया कि हम बीएड के छात्र हैं और रोग प्रमाण पत्र की जरूरत है। इस पर मेडिकल स्टोर संचालक का कहना था कि सौ रुपए लगेंगे, सोमवार को प्रमाण पत्र मिल जाएगा। पत्रिका टीम ने जब आज ही प्रमाण पत्र देने का आग्रह किया तो पैसे ज्यादा लगने की बात कही गई। करीब एक घंटे बाद ही मेडिकल स्टोर संचालक ने कॉल करके बुला लिया। उसने 150 रुपए लेकर दोनों प्रमाण पत्र दे दिए।

medical stores making fake medical certificate in doctors guidance

केस-2
शाम को बुलाया और दे दिया प्रमाण पत्र

पत्रिका टीम की सदस्य दोपहर तीन बजे नगरा स्थित मनीष आयुर्वेदिक व युनानी स्टोर पर पहुंची। वहां एक युवक बैठा मिला। उससे छह व सात दिसम्बर का मेडिकल सर्टिफिकेट मांगा गया। पहले तो उसने बैकडेट में सर्टिफिकेट बनवाने के लिए मना किया, लेकिन बाद में मान गया। उसने पत्रिका टीम सदस्य से नाम पूछा और सत्तर रुपए लिए। शाम को सात बजे जब मेडिकल शॉप पर पहुंचे तो प्रमाण पत्र दे दिया।

केस-3
पहले नियम बताए और फिर बना दिया

पत्रिका टीम ने एक अन्य युवक को लोहाखान स्थित ख्वाजा गरीब नवाज मेडिकल स्टोर भेजा। उसने वहां पास ही स्थित कक्ष में मौजूद एक चिकित्सक को बताया कि वह एक कम्पनी में काम करता है। उसे 28 से 30 अक्टूबर तक तीन दिन का मेडिकल सर्टिफिकेट चाहिए। इस पर चिकित्सक ने पहले तो कहा कि यह गलत है..., इसके लिए पर्ची लेनी पड़ती है..., सुबह नौ बजे आ जाना और सौ रुपए जमा करा देना। जब रोगी ने कहा कि अभी बना दो, सुबह मुझे लखनऊ जाना है। इस पर चिकित्सक ने सौ रुपए लिए और प्रमाण पत्र जारी कर दिया। यह प्रमाण पत्र राजकीय चिकित्सालय पुलिस लाइन के वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डॉ. पी. के. जयसिंघानी के नाम से कुलवंत सिंह राठौड़ को जारी किया गया है।

medical stores making fake medical certificate in doctors guidance

...और फोन काट दिया
इस संबंध में जब डॉ. प्रदीप जयसिंघानी से फोन पर बात की गई तो उन्होंने कुलवंतसिंह राठौड़ के नाम का सर्टिफिकेट जारी किए जाने की जानकारी नहीं होने की बात कह कर फोन काट दिया।

रिकॉर्ड देखकर बता पाऊंगा

डॉ. सुधाकर मिश्र से जब पूछा गया तो उनका कहना था कि वे रोज कई मेडिकल सर्टिफिकेट जारी करते हैं, शुक्रवार को किस नाम से मेडिकल सर्टिफिकेट जारी किए गए हैं यह रिकॉर्ड देख कर बता पाएंगे।

पत्रिका व्यू---

स्टिंग का उद्देश्य किसी को बदनाम करना नहीं है। हमारा उद्देश्य है कि इस तरह फर्जी प्रमाण पत्र जारी करने वालों के खिलाफ प्रशासन, चिकित्सा, आयुर्वेद व औषधि नियंत्रण विभाग सख्त कार्रवाई करे, ताकि भविष्य में ऐसा नहीं हो। क्योंकि इस तरह कोई भी फर्जी प्रमाण पत्र बनवाकर इसका दुरुपयोग कर सकता है। किसी आपराधिक गतिविधि को भी अंजाम दिया जा सकता है। फर्जी प्रमाण पत्रों के जरिए नौकरी हथियाने में भी कामयाब हो सकते हैं।

Show More
सोनम Reporting
और पढ़े

राजस्थान पत्रिका लाइव टीवी

हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned