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विकास कार्यों की दौड़ में एनसीआर बना गैस चैम्बर

एनसीआर में शहरीकरण की इस कदर अंधाधुंध दौड़ मची है कि लोग विकास के नाम पर वन क्षेत्र को नष्ट करन से बाज नहीं आ रहे। इसी का नतीजा है कि एनसीआर अब गैस चैम्बर का रूप लेने लगा है। यहां साल में छह महीने प्रदूषण का स्तर इतना ज्यादा रहता है कि लोगों को ग्रेप की पाबंदी झेलनी पड़ती है। एनसीआर में सरिस्का इकलौता टाइगर रिजर्व है, जो कि पारििस्थतिक संतुलन के साथ प्राणवायु देने का कार्य कर रहा है। जबकि सरिस्का जैसे बड़े वन क्षेत्र एनसीआर में पर्यावरण संतुलन के लिए जरूरी।
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अलवर

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Prem Pathak

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Updated: 3 Jan 2024, 11:39 PM IST

विकास कार्यों की दौड़ में एनसीआर बना गैस चैम्बर

विकास कार्यों की दौड़ में एनसीआर बना गैस चैम्बर

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में शहरीकरण की भूख ने वन क्षेत्र का दायरा घटा दिया, जिससे एनसीआर गैस चैम्बर में तब्दील हो गया। इसी का नतीजा है कि प्रदूषण समस्या ने दिल्ली एवं एनसीआर में लोगों काे श्वांस लेने के लिए शुद्ध वायु मिलना मुश्किल होने लगा है।

दिल्ली एवं एनसीआर में सरिस्का टाइगर रिजर्व इकलौता प्राण वायु का केन्द्र है। यहां वन क्षेत्र के सिमटते दायरे ने प्रदूषण की समस्या को बढ़ा दिया है। यही कारण है कि दिल्ली एवं एनसीआर के अन्य क्षेत्रों में प्रदूषण का स्तर देश के अन्य भागों से ज्यादा रहता है। प्रदूषण की समस्या से लोगों को शुद्ध वायु मिलना मुश्किल हो गया है, इसका खमियाजा साल के आधे दिन ग्रेप की पाबंदी के रूप में झेलना पड़ रहा है।

एनसीआर इसलिए बन रही गैस चैम्बर

दिल्ली में बीते 15 सालों में करीब 103.79 हेक्टेयर वन क्षेत्र पर विकास कार्य हुए हैं। इस जमीन पर सड़कें एवं ट्रांसमिशन लाइनें बिछाई गई है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2022-23 में 63.30 हेक्टेयर वन क्षेत्र और 2021-22 में 21.75 हेक्टेयर वन क्षेत्र का भू उपयोग बदला गया। वहीं करीब 384.38 हेक्टेयर (3.84 वर्ग किमी) वन भूमि पर अतिक्रमण भी है। इंडिया स्टेट आफ फॉरेस्ट की रिपोर्ट 2021 के अनुसार दिल्ली का वन क्षेत्र करीब 195 वर्ग किमी है। यह दिल्ली के कुल भूभौतिकीय क्षेत्र 1483 वर्ग किमी का 13.15 प्रतिशत है। इसमें से 103 वर्ग किमी वन क्षेत्र ही सरकारी रिकार्ड में अधिसूचित है। इसके अलावा एनसीआर क्षेत्र में 11 कोयला आधारित विद्युत संयंत्र हैं, जो प्रदूषक तत्व नाइट्रोजन ऑक्साइड, सल्फर डाइ ऑक्साइड का उत्सर्जन करते हैं। सीएसई की रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली व एनसीआर क्षेत्र में प्रदूषक कण पीएम 2.5 कोयला आधारित बिजली संयंत्रों से निकलने वाले उत्सर्जन का हिस्सा करीब 8 फीसदी है।

सरिस्का 765.71 वर्ग किमी वन क्षेत्र

एनसीआर में एक मात्र टाइगर रिजर्व सरिस्का है, यहां 765.71 वर्ग किमी क्षेत्र खुला वन क्षेत्र हैं। यानी सरिस्का के कुल क्षेत्रफल में 66.83 प्रतिशत वन क्षेत्र हैं। साथ ही 37.13 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में झाडि़यां फैली है। यहां की हरियाली एनसीआर में शामिल अलवर, भिवाड़ी ही नहीं, बल्कि दिल्ली, गुरुग्राम समेत पूरे एनसीआर को प्राणवायु देने का कार्य करती है। पिछले सालों में कोरोना के दौरान सरिस्का एनसीआर को प्राणु वायु का प्रमुख केन्द्र के रूप में साबित भी हो चुकी है।

अलवर जिले के कुल क्षेत्रफल का 14 फीसदी वन

अलवर जिले का भौगोलिक क्षेत्रफल 8380 वर्ग किलोमीटर है। इसमें 1195.91 वर्ग किलोमीटर वन क्षेत्र है। यानी जिले के कुल क्षेत्रफल का 14.27 प्रतिशत वन क्षेत्र है। हालांकि अलवर जिले में भी 0.75 फीसदी वन क्षेत्र में कमी आई है।