अलवर.एक तरफ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के स्वच्छ भारत अभियान पर देश में हर साल हजारों करोड़ रुपया खर्च हो रहा है, दूसरी और अलवर जिला मुख्यालय से करीब दस किलोमीटर दूर ही गोलेटा गांव के आसपास कचरा, बदबू, मक्खी और मच्छरों से वहां रहने वाले परिवारों के रिश्ते नहीं हो पा रहे हैं। अलवर शहर से रोजाना डेढ़ सौ टन कचरा एकत्रित कर करीब दस किलोमीटर दूर के गांव गोलेटा, कंजरबास, देसूला, घेघोली व सैय्यद कॉलोनी के आसपास खुले में फेंका जा रहा है। यहां कचरा दिनभर जलता रहता है। इन गांवों के घरों में रोजाना चाय व सब्जी में मच्छर-मक्खी गिरना आम बात हैं। मजबूरी है कि लोग अपने हाथ से ही मच्छर मक्खी को निकालकर उसी को काम में लेते हैं। गोलेटा निवासी जमील ने बताया कि बदबू का आलम यह है कि रात को सोते समय घुटन होती है। बच्चे टीबी के शिकार होते जा रहे हैं। इतनी गंदगी व बदबू के कारण कचरा क्षेत्र के आसपास से लगते गांव-ढाणी के घरों में रिश्तेदार भी आने से कतरा रहे हैं। बहुत से परिवारों के रिश्तेदारों को उनके घर आए पांच साल हो गए हैं। बहुत से परिवारों के बच्चों की शादी नहीं हो रही है। नए विवाह-सम्बंध कराना बडी चुनौती हो गई है। पूरे अलवर शहर का कचरा जा रहा गोलेटा के आसपास पूरे अलवर शहर का कचरा (मृत पशु भी शामिल) पटका जा रहा है। कचरा निस्तारण का कोई प्लांट नहीं है। जिसके कारण कचरा सरकारी जमीन पर कई बीघा में पड़ा है। एक दिन में सवा सौ से डेढ़ सौ टन कचरा पहुंचता है। आग लगने के कारण कचरे का धुआं 24 घण्टे अविरल निकलता है। बच्चे कचरे में से कबाड़ा ढूंढ़ रहे आसपास के बच्चे छोटे-मोटे लालच के चलते जले कचरे में से ही प्लास्टिक का कबाड़ ढूंढऩे में लगे रहते हैं। गंदगी व बदबू के कारण बच्चों में टीबी होती जा रही है। सैय्यद कॉलोनी निवासी बच्चे की मां अफसाना ने बताया कि 12 साल से कचरा यहां डाला जा रहा है। सब बच्चों के टीबी जैसे हाल हैं। दिन भर खांसते रहते हैं। छोटे से लालच के कारण बच्चे कचरे में प्लास्टिक का सामान ढूंढऩे में लगे रहते हैं। एक-दो कबाड़ी भी यहां रोज आते हैं। जो बच्चों को खाने-पीने की चीज देकर प्लास्टिक लेकर जाते हैं। इस लालच में बच्चे धुंआ उठते कचरे में भी हाथ मारते रहते हैं।
फैक्ट फाइल
अलवर शहर से रोज निकल रहा कचरा – करीब 150 टन
कहां फेंका जा रहा- गोलेटा (रामगढ़ क्षेत्र)
कितनी आबादी आसपास – करीब 2000
कचरा निस्तारण प्लांट – कोई नहीं
स्वच्छ अभियान पर अलवर शहर में खर्च – करीब 15 करोड़
नोट : कचरा जलाना सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन। कचरा निस्तारण नहीं होना भी सरकार की विफलता और नियमों का उल्लंघन।
इस कचरे के निस्तारण के लिए ट्रीटमेंट प्लांट लगाया जाना जरूरी है। बगड़ का तिराहा पर इसकी जगह भी चिह्नित है लेकिन, कोई ठेकेदार आगे नहीं आ रहा है। जिसके कारण समस्या बनी हुई है। जल्दी कोई न कोई समाधान कराने का प्रयास कर रहे हैं। अशोक खन्ना, सभापति, नगर परिषद अलवर