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उधार में चीनी व ईंधन लाकर नौनिहालों को दूध पिलाया, पर भुगतान नहीं आया…पढ़ें यह न्यूज

नौगांवा. नौनिहालों को दूध पिलाने की मुख्यमंत्री बाल गोपाल योजना में सरकारी विद्यालयों में दूध गर्म करने वाले कॉर्मिकों को अपने अल्प मानदेय का सालभर से इंतजार है, लेकिन इतने समय बाद भी उसे भुगतान नहीं मिल पा रहा है। इसके अलावा दूध, चीनी और गर्म करने में लगने वाले ईंधन का भुगतान भी लम्बे समय से अटका हुआ है।

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Status of Chief Minister Bal Gopal Scheme

सरकारी स्कूलों में बच्चों को पाउडर से निर्मित दूध का वितरण

नौगांवा. नौनिहालों को दूध पिलाने की मुख्यमंत्री बाल गोपाल योजना में सरकारी विद्यालयों में दूध गर्म करने वाले कॉर्मिकों को अपने अल्प मानदेय का सालभर से इंतजार है, लेकिन इतने समय बाद भी उसे भुगतान नहीं मिल पा रहा है। इसके अलावा दूध, चीनी और गर्म करने में लगने वाले ईंधन का भुगतान भी लम्बे समय से अटका हुआ है।

गौरतलब है कि सरकारी स्कूलों में बच्चों को पाउडर से निर्मित दूध का वितरण किया जा रहा है। इसका वितरण वर्तमान में भी किया जा रहा है। इस दूध को नौनिहालों को गर्म करके पिलाने के लिए प्रत्येक विद्यालय में एक कॉर्मिक लगाया हुआ है, जिसे इसके लिए 500 रुपए मासिक मानेदय का प्रावधान है। दूध में चीनी और गर्म करने के लिए उपयोग लिए जा रहे ईंधन का खर्चा भी विभाग की ओर से देय है, लेकिन अप्रेल 2023 से इन खर्चो का भुगतान विभाग की ओर से स्कूलों को नहीं किया गया है। ऐसे में संस्था प्रधान उधारी की चीनी और ईंधन से काम चला रहे हैं, वहीं अल्प मानदेय कॉर्मिक को आर्थिक तंगी भुगतनी पड रही है। विभागीय आंकडों के अनुसार रामगढ ब्लाॅक के 225 विद्यालयों में नौनिहालों को दूध पिलाया जा रहा है, जहां का भुगतान अटका हुआ है।
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रामगढ बलॉक के 225 स्कूलों में नौनिहालों का आंकडा
कक्षा छात्र छात्रा कुल विद्यार्थी
1 से 5 10035 11086 21121
6 से 8 5883 6364 12247
कुल 15918 17450 33368
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यह है दूध की मात्रा का प्रावधान
मुख्यमंत्री बाल गोपाल योजना के तहत कक्षा 1 से 5 तक के प्रत्येक बच्चे को 150 मिलीग्राम पानी में 15 ग्राम दूध पाउडर तथा 8 ग्राम चीनी देने का प्रावधान है। कक्षा 6 से 8 तक के नौनिहालों को 200 मिलीग्राम पानी में 20 ग्राम दूध और 12 ग्राम चीनी का प्रावधान है। ऐसे में स्कूलों के शिक्षक या तो अपने स्तर पर इसका खर्चा उठा रहे हैं और या उधार लेकर काम चला रहे हैं।
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पहले बना पौष्टिकता बढाने का मन, फिर मारा आदेशों पर यू-टर्न
हाल ही में विभाग की ओर से बच्चों को पिलाए जाने वाले दूध में पौष्टिकता बढाने का मन हुआ, जिसके बाद उन्होंने स्कूलों में मिलने वाले पाउडर के दूध के स्थान पर गाय के दूध के आदेश हुए, लेकिन इन आदेशों के चंद दिनों बाद ही वापस ले लिया। फिलहाल स्कूलों में पाउडर का दूध ही नौनिहालों को उपलब्ध कराया जा रहा है।
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कई स्कूलों में बची दूध की सीमित मात्रा, तो कुछ में बहुत ज्यादा बकाया
स्कूलों में दूध के स्टाॅक की बात की जाए तो फिलहाल स्कूलों में इस सत्र की समाप्ति तक का दूध का स्टाॅक बचा हुआ है, वहीं कुछ स्कूल सैकडों किलोग्राम दूध का स्टाॅक करके बैठे हैं। दूध के ज्यादा बचे स्टाॅक के लिए अधिकारियों ने हाल ही में स्कूलों को फटकार लगाई है और आवश्यकता से ज्यादा दूध को सीबीईओ कार्यालय में भिजवाने के आदेश दिए है।

इधर मामले में सीबीईओ रामगढ़ रमेश गांधी का कहना है कि भुगतान के लिए बिल बनाकर विभाग के उच्चाधिकारियों को भेजे गए है और वो प्रक्रियाधीन है। जैसे ही विभाग की ओर से भुगतान होगा, स्कूलों के खातों में डाल दिया जाएगा।

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