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विरासत को बचाने की पहल…माचाड़ी का किला और रानी का कुआं का निखरेगा सौंदर्य

पुरातत्व विभाग करा रहा है चार करोड़ की लागत से जीर्णोंद्धार

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विरासत को बचाने की पहल...माचाड़ी का किला और रानी का कुआं का निखरेगा सौंदर्य

विरासत को बचाने की पहल...माचाड़ी का किला और रानी का कुआं का निखरेगा सौंदर्य

जिले में ऐतिहासिक स्थलों की कमी नहीं है यहां एक से बढकऱ एक विरासतकालीन इमारतें हैं, जिन्हें देखने के लिए हर साल हजारों पर्यटक अलवर आते हैं। इन इमारतों का इतिहास जानने की भी पर्यटकों में उत्सुकता है। लेकिन ये इमारतें जीर्ण-शीर्ण हो रही है। इसे देखते हुए पुरातत्व विभाग ने इमारतों की मरम्मत की दिशा में काम शुरू किया है। राजगढ़ में माचाड़ी का किला और यहां पर बने रानी का कुआं को विभाग की ओर से जीर्णोद्धार करवाया जा रहा है।

रानी का कुआं में बनी हुई हैं सीढिय़ां और तिबारे
माचाड़ी बस स्टैंड के उत्तर में बाबा मक्खन दास के मंदिर के पास एक प्राचीन कुआं है जो कि रानी का कुआं कहलाता है। इतिहासकारों के अनुसार इस कुएं को राजा ईश्वर सेन की रानी चंपा देवी ने वि. स. 1458 , ई. संवत 1402 में बनवाया था। यह कुआ अलवर जिले की अद्वितीय ऐतिहासिक धरोहर है। इस कुएं में नीचे जाने के लिए सीढिय़ां बनी हुई है। नीचे कई तलों में बने तिबारों में जल स्तर, जल के उतार चढ़ाव के साथ घटता बढ़ता रहता है। जल अधिक होने पर तिबारे डूब जाते हैं। इस कुएं में एक हनुमान मंदिर और एक शिव मंदिर भी है। मध्य काल में बना यह कुआं देखरेख ना होने पर जर्जर होने लगा था। इस कुएं पर काम होने के बाद इसका खोया हुआ आकर्षण पर्यटकों को फिर से दिखाई देगा।

बराई माता का मंदिर
माचाड़ी बांध की पाल पर बांध के दूसरी और सडक़ पार बराई माता का मंदिर है। बडग़ूजरों के राजा के खत्म होने पर माचाड़ी पर आमेर नरेश जयङ्क्षसह ने कब्जा कर कल्याण ङ्क्षसह को ढाई गांव- माचाड़ी, राजगढ़ और आधा राजपुर की जागीर उनकी सेवाओं से प्रसन्न होकर दे दी थी। कल्याण ङ्क्षसह जब घेरे में फंस गए तो उन्होंने बराई माता को याद किया तो घोडे ने घेरे में से छलांग लगाकर उनको कुशलता पूर्वक बाहर निकाल लिया था।

माचाड़ी का किला की चित्रकारी और बनावट है खास
माचाड़ी से सटी पहाड़ी पर माचाड़ी का किला जीर्ण शीर्ण हालत में है। इतिहासकारों के अनुसार इस किले का निर्माण ई स. 1246 में बडगूजरों ने करवाया था। पहाड़ी पर खंड खंड होकर बिखरा ये छोटा सा किला अब छोटे अवशेष के रूप में ही बचा हुआ हैं। इसी हिस्से के एक मुख्यद्वार में प्रवेश के बाद एक बडा प्रांगण है। यहां से सीढिय़ों से एक रास्ता ऊपर की तरफ रानी के महल की तरफ जाता है। महल में की गई चित्रकारी और इसकी बनावट पर्यटकों को आकर्षित करती है। शोधार्थी भी यहां आते रहते हैं।