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50 हजार का ईनामी हत्यारा गिरफ्तार, थर-थर कांपते थे गांव वाले

लालमन के पास से पुलिस ने 315 बोर की रायफल और चार ज़िंदा कारतूस भी बरामद किये हैं

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Hariom Dwivedi

Jun 16, 2016

police arrested wanted killer

police arrested wanted killer

अम्बेडकर नगर. 2014 से फरार चल रहे शातिर अपराधी लालमन यादव को जिले की स्वॉट टीम ने गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है। इसकी गिरफ़्तारी के लिए सूबे के डीजीपी ने 50 हजार रुपये ईनाम की घोषणा किया था। इस अपराधी के पीछे जिले की पुलिस टीम के अलावा डीजीपी ने यूपी एसटीएफ को भी लगा रखा था। स्वाट टीम ने इस शातिर सज़ायाफ्ता अपराधी को गिरफ्तार कर लिया।

कौन है लालमन यादव
जैतपुर थानाक्षेत्र के करमुलहा गांव का निवासी शातिर बदमाश लालमन यादव 1999 में इंद्रभान पांडेय की हत्या के मामले में फैज़ाबाद जेल में बंद हुआ था। न्यायालय ने इस मुक़दमे की सुनवाई करते हुये लालमन यादव को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। जमानत पर रिहा होने के बाद से ही लालमन यादव फरार चल रहा था। 2014 में लालमन ने हत्याकांड के मुख्य गवाह व इंद्रभान के भतीजे उदयभान की हत्या कर दी थी। तब से यह शातिर अपराधी पुलिस को गुमराह कर फरार चल रहा था। लालमन की गिरफ्तारी में सफलता न मिलने के कारण तत्कालीन एसपी ने उसकी गिरफ़्तारी के लिये पांच हजार रुपये ईनाम की घोषणा की। बावजूद इसके वह पुलिस की गिरफ्त से दूर रहा।

मामला हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच पहुंचा, जहां पर लालमन की गिरफ़्तारी न कर पाने को लेकर मामले में हाईकोर्ट ने एसपी अजय सिंह को कड़ी फटकार लगाई। इसके बाद डीजीपी ने 29 अप्रैल को लालमन की गिरफ़्तारी के लिये 50 हजार रुपये ईनाम की घोषणा की। इतना ही नहीं उसकी गिरफ्तारी के लिए जिले की पुलिस के अलावा यूपी एसटीएफ को जिम्मा सौंप दिया। स्वाट टीम और एसटीएफ कई बार लालमन को गिरफ्तार करने के लिये उसके गांव पहुंची, लेकिन सफलता हाथ नहीं लग रही थी, क्योंकि लालमन मोबाईल का इस्तेमाल नहीं करता था। आखिर में स्वाट टीम ने मुखबिरों का एक ऐसा जाल बिछाया, जिसके माध्यम से पुलिस सटीक सुराग के आधार पर उसे गिरफ्तार करने में सफल हो गई।

दहशत में जीते थे गांव के लोग
लालमन द्वारा फरारी के दौरान 2014 में की गई दूसरी हत्या के बाद से उससे पूरा गांव दहशत खाता था। कोई उसके बारे में कुछ भी बोलने को तैयार नहीं था। इसका अपने गांव में इस कदर आतंक था कि जिसके यहां इसकी इच्छा होती वहीं खाता और सोता था। किसी की क्या मजाल जो इसे मना कर सके। लालमन की रोज की दिनचर्या बन गई थी कि वह रात में किसी के भी घर पहुंच कर खाना खाता और वहीं सो जाता था और सुबह होते ही गांव के बाहर तमसा नदी के किनारे चला जाता था।

पुलिस ने लालमन की गिरफ्तारी के लिये इसके घर पर दबिश भी दी, लेकिन इसकी दहशत के आगे गांव के लोग इसके खिलाफ मुंह नहीं खोलते थे। अपने कंधे पर बंदूक टांग कर ये शातिर अपराधी दिन भर गांव के बाहर से बहने वाली तमसा नदी के किनारे झाड़ियों में छिपा रहता था | हालांकि, इसके ऊपर डीजीपी द्वारा 50 हजार रुपये ईनाम और फटकार के बाद हरकत में आई पुलिस ने आखिरकार उसे गांव के पास से गिरफ्तार कर लिया। उसके पास से पुलिस ने 315 बोर की रायफल और चार ज़िंदा कारतूस भी बरामद किये हैं।

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