पति की मौत के बाद पत्नी थी बेबस-लाचार, ‘अनोखी सोच’ ने रीति-रिवाज से कराया अंतिम संस्कार

Funeral: भिक्षाटन कर जिंदगी गुजारने वाले वृद्ध की मौत (Death) के बाद सामाजिक संस्था ने किया अंतिम संस्कार, मृतक की पत्नी के पास नहीं थे रुपए

By: rampravesh vishwakarma

Published: 17 Oct 2020, 10:06 PM IST

अंबिकापुर. शहर में भिक्षाटन (Begging) कर जीवन यापन करने वाले वृद्ध की मौत हो गई। उसकी पत्नी के पास अंतिम संस्कार के लिए रुपए नहीं थे। इस स्थिति में महिला काफी दुखी थी कि उसके पति का अंतिम संस्कार कैसे होगा। इसी बीच इसकी जानकारी शहर की सामाजिक संस्था अनोखी सोच (Anokhi soch) को मिली तो उन्होंने वृद्ध का अंतिम संस्कार करने का निर्णय लिया।

संस्था के सदस्यों ने वृद्ध की अंतिम यात्रा निकाल कर पूरे विधि-विधान से उसका अंतिम संस्कार कराया। इस दौरान मृतक की पत्नी ने अपने पति को मुखाग्नि दी। संस्था के सदस्यों ने आर्थिक व शारीरिक सहयोग कर मिसाल पेश की है।
गौरतलब है कि 70 वर्षीय रामपुकार सिंह सूरजपुर जिले के कुदरगढ़ का रहने वाला था।

वह काफी दिनों से पत्नी इंदरमणि के साथ अंबिकापुर के भाथूपारा में रहकर भिक्षाटन कर जीवन यापन करता था। 8 दिन पूर्व वह हनुमान मंदिर के पास गिर गया था। उसे इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इलाज के बाद पत्नी उसे घर में रखी थी। लेकिन शनिवार की सुबह उसकी मौत (Death) हो गई।

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पति की मौत होने पर उसका अंतिम संस्कार करने के लिए पत्नी के पास रुपए नहीं थे। महिला पति का अंतिम संस्कार के लिए मणिपुर चौकी पहुंची। यहां उसे अनोखी सोच संस्था के बारे में बताया गया।

महिला ने संस्था के सदस्यों से संपर्क की। इस पर सामाजिक संस्था अनोखी सोच द्वारा वृद्ध अंतिम संस्कार करने का निर्णय लिया गया। संस्था के सदस्यों ने मृतक की अंतिम यात्रा निकाल हिंदू रीति-रिवाज के साथ अंतिम संस्कार नगर के गंगापुर स्थित मुक्तिधाम में किया। इस दौरान मृतक की पत्नी ने पति को मुखाग्नि दी।

अंतिम संस्कार में संस्था के अध्यक्ष सूर्यप्रकाश साहू , अभय साहू, अजय साहू, संजू, चंद्रप्रताप ङ्क्षसह, बिट्टू, मिथलेश, विकास, देव, संतोष, मुकेश, अनिल, गोपी, सावन, गुड्डू, सत्यम सहित अन्य लोग शामिल रहे।


दुख की घड़ी में परिवार बनकर आए सामने
संस्था के सदस्यों ने आर्थिक मदद के साथ-साथ शारीरिक मदद भी की। संस्था के सदस्यों ने मृतक का परिवार बनकर अपने कंधों पर अर्थी उठाकर शव यात्रा निकाली, फिर गंगापुर स्थित मुक्तिधाम ले जाकर उसका अंतिम संस्कार कराया।


इससे पूर्व भी कर चुके हैं मदद
संस्था के सदस्यों ने कुछ दिन पूर्व ही एक असहाय मजदूर महिला की बच्चे की मौत के बाद उसका अंतिम संस्कार किया। वहीं एक निर्धन महिला की मौत हो जाने पर उसका भी अंतिम संस्कार (Funeral) करने यही संस्था सामने आई थी।

rampravesh vishwakarma Desk
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