केन्द्रीय शहरी विकास मंत्री एम. वेकैंया नायडू ने वर्ष 2022 तक गरीबों को सस्ते मकान उपलब्ध कराने का वादा पूरा करने के लिए राज्य सरकारों और स्थानीय निकायों के सहयोग को जरुरी बताया है।
केन्द्रीय शहरी विकास मंत्री एम. वेकैंया नायडू ने वर्ष 2022 तक गरीबों को सस्ते मकान उपलब्ध कराने का वादा पूरा करने के लिए राज्य सरकारों और स्थानीय निकायों के सहयोग को जरुरी बताया है।
नायडू ने मंगलवार को लोकसभा में आवास और शहरी गरीबी उपशमन मंत्रालय के नियंत्रणाधीन अनुदानों की मांगो पर चर्चा के जवाब में कहा कि सरकार सबके लिए आवास योजना के तहत गरीबों को सस्ते मकान उपलब्ध कराने पर तेजी से काम कर रही है, लेकिन इसके लिए उसे राज्य सरकारों, विभिन्न मंत्रालयों, स्थानीय निकायों और यहां तक कि निजी क्षेत्र से भी पूरे सहयोग की दरकार है।
उन्होंने कहा कि यह बेहद चुनौती भरा काम है। संसाधनों की कमी भी है। सरकार के लिए अकेले इसे पूरा करना कठिन है इसमें सबका सहयोग चाहिए। मंत्रालय की अनुदान मांगों को सदन ने ध्वनिमत से मंजूरी दे दी।
देश में 1 करोड़ 80 लाख सस्ते मकानों की कमी
नायडू ने सबके लिए आवास योजना समय पर पूरा होने और इसके लिए संसाधनों की कमी पर सदस्यों की आशंकाओं के जवाब में कहा कि यह बड़ी चुनौती है, लेकिन हर गरीब को घर मिले इसके लिए सरकार अपने सारे प्रयास और संसाधन झोंकने से पीछे नहीं हटेगी। देश में इस समय एक करोड 80 लाख सस्ते मकानों की कमी है। सरकार अबतक ऐसे 7 लाख से अधिक घरों के निमार्ण को मंजूरी दे चुकी है, जिसमें से पिछले 19 महीनों में ही दो लाख से अधिक मकान बनकर तैयार हो चुके हैं।
उन्होंने कहा कि आवासीय योजना को पूरा करने के लिए भूमि आवंटन, आधारभूत संरचनाओं, विभिन्न एजेंसियों से नियामक मंजूरी सबकी दरकार होती है इस काम को आसान बनाने के लिए सिंगल विंडो सिस्टम शुरु किया गया है। राज्य सरकारों, स्थानीय निकायों, विभिन्न मंत्रालयों और निजी क्षेत्र से सहयोग लिया जा रहा है।
तैयार हो चुके कुछ सस्ते मकानों के अभी तक खाली पड़े होने के मामले में नायडू ने कहा कि ऐसा इसलिए हुआ है, क्योंकि वहा पीने के पानी, पास में स्कूल, स्वास्थ्य सेवाएं और साफ सफाई जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई गई हैं। ये सुविधाएं उपलब्ध कराना स्थानीय निकायों का काम है। इसलिए सरकार इसमें स्थानीय निकायों से पूरा सहयोग चाहती है। मूलभूत सुविधाएं युक्त आवास हर किसी का मौलिक अधिकार है।
किसी भी राज्य के साथ भेदभाव नहीं हो रहा
उन्होंने कहा कि देश के 15 राज्यों में गरीबों के लिए 10 लाख से ज्यादा सस्ते मकान बनाने की 903 परियोजनाओं पर काम चल रहा है। इसमें राज्यों को लेकर पक्षपात की बात गलत है। आवासीय परियोजनाओं के लिए प्रस्ताव राज्य सरकारों को भेजना है वह इसमें देरी करेंगे तो केन्द्र कुछ नहीं कर सकेगा। उन्होंने कहा कि ऐसी परियोजनाओं का आवेदन करते समय राज्यों को जमीन और लाभार्थियों की सही पहचान करनी होगी।
उन्होंने कहा कि सस्ते आवास बनाने के लिए केन्द्र की ओर से डेढ लाख रुपए की मदद दी जाएगी बाकी काम राज्यों की मदद से पूरा होगा। शहरों में गरीबी उन्मूलन के लिए दीनदयाल अंत्योदय योजना शुरू की गई है। इसमे गरीबों के कौशल विकास प्रशिक्षण की व्यवस्था की गई है। उन्होंने कहा कि देश में रियलटी क्षेत्र को नियंत्रित करने और उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा के लिए रियल स्टेट कानून को एक मई से लागू कर दिया गया है।