कई बांधों में पिछले वर्ष की तुलना में अच्छी स्थिति
गुजरात में 15 जून के आसपास मानसून के दस्तक देने की भविष्यवाणी की जा रही है। राज्य में इन दिनों भीषण गर्मी के बीच सरदार सरोवर (नर्मदा बांध) समेत प्रमुख 207 बांधों में क्षमता का 48 फीसदी पानी बचा है। पिछले वर्ष की तुलना में इस अवधि के दौरान 1264 मिलियन क्यूबिक मीटर (एमसीएम) अधिक है। सौराष्ट्र कच्छ के बांधों में पानी का संग्रह 30 से 31 फीसदी के बीच में है, जो अन्य इलाकों की तुलना में कम है। राज्य के सबसे बड़े नर्मदा बांध की जल संग्रह की कुल 9460 एमसीएम की क्षमता है, इसके मुकाबले फिलहाल 5479.62 एमसीएम पानी (57.92 प्रतिशत) उपलब्ध है। बांध में पिछले वर्ष की तुलना में इस अवधि में 235 एमसीएम पानी का अधिक संग्रह है। बांध की अधिकतम ऊंचाई 138.68 मीटर है, फिलहाल जलस्तर 123.10 मीटर पर है।दूसरी ओर रीजन के आधार पर देखा जाए तो सबसे अधिक जल संग्रह दक्षिण गुजरात के 13 बांधों में है। इन बांधों में जलसंग्रह क्षमता 8603.70 एमसीएम है, उसके मुकाबले फिलहाल 4061.62 एमसीएम पानी है, जो 47.21 फीसदी है। पिछले वर्ष के मुकाबले इस रीजन में भी संग्रह अधिक है।
मध्य गुजरात के 17 बांधों में 2347.37 एमसीएम जल संग्रह की क्षमता है, इसके मुुकाबले 1088.14 एमसीएम पानी शेष रहा है जो 46.36 फीसदी है। इस रीजन में पिछले वर्ष के मुकाबले संग्रह में आंशिक कमी आई है। 1929.20 एमसीएम पानी की क्षमता वाले उत्तर गुजरात रीजन के 15 बांधों में फिलहाल 598 एमसीएम पानी ही शेष है जो क्षमता का 31 फीसदी है, हालांकि इस क्षेत्र में पिछले वर्ष के मुकाबले संग्रह अधिक है।
सबसे अधिक 141 बांधों वाले सौराष्ट्र रीजन में जलसंग्रह की क्षमता 2588.52 एमसीएम है। फिलहाल यहां 786.74 एमसीएम पानी शेष रहा है, जो 30.39 फीसदी है। इसी तरह से कच्छ रीजन के 20 बांधों में क्षमता का 29.8 फीसदी ही पानी शेष रहा है। इन बांधों में 325.24 एमसीएम जलसंग्रह की क्षमता है, लेकिन फिलहाल यहां महज 94.58 एमसीएम ही पानी शेष रहा है।
राज्य के 16 बांध ऐसे भी हैं जिनमें फिलहाल क्षमता का एक फीसदी भी पानी शेष नहीं रहा है। इनमें भी सात सूखी स्थिति में हैं। इन बांधों में ज्यादातर सौराष्ट्र और कच्छ के हैं।