अहमदाबाद

बात सुनिए, शायद किसी की जिंदगी बच जाए

आत्महत्या की रोकथाम किसी घटना के बाद उसके कारण तलाशने से नहीं, बल्कि उससे पहले व्यक्ति के मन में चल रहे संघर्ष को पहचानने और उसकी बात सुनने से शुरू होती है।
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World Suicide Prevention Day
एआइ फोटो।

अहमदाबाद स्थित मानसिक स्वास्थ्य अस्पताल के टेली-मानस हेल्पलाइन पर आने वाली कॉल और मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुभव बताते हैं कि संकट में पहुंचने से पहले ही कई लोगों के व्यवहार में बदलाव दिखाई देने लगते हैं।

व्यक्ति कई बार सीधे मदद नहीं मांगता, लेकिन बढ़ती चुप्पी, निराशा, सामाजिक दूरी या खुद को बोझ समझने जैसी बातें संकेत दे सकती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे संकेतों को नजरअंदाज करने के बजाय समय पर बातचीत और मदद उपलब्ध कराई जाए तो संकट को गंभीर होने से रोका जा सकता है।अहमदाबाद के मानसिक स्वास्थ्य अस्पताल की टेली-मानस हेल्पलाइन पर रोज 180 से 200 कॉल आ रहे हैं। इनमें करीब 5 प्रतिशत कॉल आत्महत्या के विचारों से जुड़े हैं, यानी रोज लगभग 9 से 10 लोग इस गंभीर मानसिक संकट में मदद मांग रहे हैं। करीब 15 प्रतिशत कॉल तनाव और 20 प्रतिशत डिप्रेशन-एंग्जाइटी से संबंधित हैं। आंकड़े बताते हैं कि मानसिक परेशानी को शुरुआती स्तर पर पहचानना और व्यक्ति को अकेला न छोड़ना कितना जरूरी है।

दबाव एक नहीं, कई हो सकते हैं

मानसिक स्वास्थ्य अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक एवं मनोचिकित्सक डॉ. अजय चौहाण के अनुसार आत्महत्या के पीछे सामान्यत: कोई एक कारण नहीं होता। परीक्षा और करियर का दबाव, असफलता का डर, बुलिंग-रैगिंग, अकेलापन, पारिवारिक अपेक्षाएं, रिश्तों की परेशानी, आर्थिक चिंता और भविष्य की अनिश्चितता जैसे कई दबाव एक साथ असर डाल सकते हैं। ऐसे में सवाल यह नहीं होना चाहिए कि व्यक्ति दबाव क्यों नहीं झेल पाया, बल्कि यह समझना जरूरी है कि वह किन परिस्थितियों से गुजर रहा था और उसे समय पर सहारा मिला या नहीं।

इन संकेतों को भी नहीं लें हल्के में

डॉ. चौहाण के अनुसार व्यवहार में अचानक बदलाव, लोगों से दूरी, रुचि कम होना, नींद या भूख में बदलाव, अत्यधिक चुप्पी, चिड़चिड़ापन, निराशा या खुद को दूसरों पर बोझ समझना जैसे संकेतों को हल्के में नहीं लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस तरह के संकेतों को टेली-मानस पर भी काफी गंभीरता से लिया जाता है। प्रशिक्षित काउंसलर पहले व्यक्ति की समस्या और उसकी गंभीरता का आकलन करते हैं। मामलों को माइल्ड, मॉडरेट और सीवियर श्रेणी में बांटा जाता है। आत्महत्या के विचार वाले मामलों में जरूरत पड़ने पर परिवार और पुलिस के साथ समन्वय कर तत्काल सहायता पहुंचाने की व्यवस्था भी की जाती है।

भारतीय परंपरा में भी मन को समझने पर जोर

अस्पताल के सामाजिक विभागाध्यक्ष अर्पण नायक के अनुसार भारतीय चिकित्सा परंपरा में मानसिक स्वास्थ्य को लेकर विचार नया नहीं है। भारतीय ज्ञान परंपरा में भी मन, विचार और व्यवहार को स्वास्थ्य का महत्वपूर्ण हिस्सा माना गया था

Updated on:
09 Sept 2026 10:35 pm
Published on:
09 Sept 2026 10:35 pm