अजमेर

सावन का सत्कार: जहां बालाजी की छत्रछाया में विराजते हैं भोलेनाथ, सावन में उमड़ती है श्रद्धा

Aug 03, 2026
Rajasthan

खण्डार. अरावली की पहाड़ियों के बीच स्थित ऐतिहासिक तारागढ़ दुर्ग केवल अपनी स्थापत्य कला के लिए ही नहीं, बल्कि धार्मिक आस्था के प्रमुख केंद्र के रूप में भी पहचान रखता है। दुर्ग परिसर में विराजित नृसिंहधार वाले बालाजी मंदिर के समीप स्थित प्राचीन शिवालय में सावन माह के दौरान श्रद्धालुओं की विशेष आस्था उमड़ती है। मान्यता है कि यहां स्थापित शिवलिंग पर जलाभिषेक और रुद्राभिषेक करने से भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है तथा मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

शिवालय वर्षों से साधु-संतों की आराधना का केंद्र रहा

स्थानीय परंपराओं के अनुसार यह शिवालय वर्षों से साधु-संतों की आराधना का केंद्र रहा है। सावन के प्रत्येक सोमवार को सुबह से ही श्रद्धालु जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा और पुष्प अर्पित कर भगवान शिव का अभिषेक करते हैं। मंदिर परिसर 'हर-हर महादेव' और 'बम-बम भोले' के जयघोष से भक्तिमय हो उठता है।

एक साथ दर्शन से आध्यात्मिक ऊर्जा व मानसिक शांति की अनुभूति:

श्रद्धालुओं का मानना है कि नृसिंहधार बालाजी और शिवालय में एक साथ दर्शन-पूजन करने से आध्यात्मिक ऊर्जा और मानसिक शांति की अनुभूति होती है। इसी कारण सावन में आसपास के गांवों सहित दूर-दराज से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं।

क्षेत्र की धार्मिक संस्कृति को सहेजे हुए है

मंदिर समिति के अनुसार सावन भर प्रतिदिन विशेष पूजा-अर्चना, रुद्राभिषेक और शिव आरती का आयोजन किया जाता है। प्राकृतिक वातावरण से घिरा यह प्राचीन धाम धार्मिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत का जीवंत प्रतीक है। सावन में यहां उमड़ने वाली आस्था की यह परंपरा आज भी क्षेत्र की धार्मिक संस्कृति को सहेजे हुए है।

Updated on:
03 Aug 2026 06:00 am
Published on:
03 Aug 2026 06:00 am