
Hathras Rape Victim Family Home Jail: उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले के बूलगढ़ी गांव में 2020 में हुई दलित युवती की सामूहिक बलात्कार और मौत की घटना के छह साल बीत चुके हैं। पीड़िता के परिवार का कहना है कि चौबीसों घंटे सुरक्षा के बावजूद उनकी जिंदगी अब घर में जेल जैसी हो गई है। परिवार के सदस्यों ने बताया कि इन वर्षों में कोई सामाजिक जीवन नहीं रहा। कोई उनसे मिलने नहीं आता और परिवार का कोई सदस्य बाहर जाकर रोजी-रोटी नहीं कमा सकता। आर्थिक संकट इतना गहरा है कि परिवार भूखमरी की कगार पर पहुंच चुका है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में उत्तर प्रदेश सरकार को तीन महीने के अंदर परिवार को नोएडा या गाजियाबाद में पुनर्वासित करने का आदेश दिया है। परिवार के आठ सदस्य हैं-माता-पिता, दो भाई, एक भाभी और तीन बच्चे। कोर्ट ने राज्य सरकार के कसगंज, एटा या अलीगढ़ में स्थानांतरण के प्रस्ताव को खारिज करते हुए कहा कि यह कानून की नजर में कोई फैसला नहीं है। परिवार ने नोएडा या गाजियाबाद में जाने की मांग की थी। पीड़िता के भाई ने कहा कि इस आदेश से उन्हें राहत मिली है और अब वे नई जिंदगी शुरू करने की उम्मीद कर रहे हैं।
परिवार का कहना है कि सीआरपीएफ सुरक्षा होने के बावजूद रोजमर्रा की जिंदगी बेहद अलग-थलग है। भाई ने बताया कि ऐसा लगता है जैसे हम घर में ही जेल में बंद हैं। कोर्ट की सुनवाई के लिए लखनऊ, दिल्ली या अन्य जगह जाने पर उन्हें खुद निजी वाहन का इंतजाम और खर्च करना पड़ता है। पिछले छह सालों में कानूनी प्रक्रिया पर काफी पैसा खर्च हो चुका है। स्थानीय कुछ लोगों की दुश्मनी से सुरक्षा की चिंता और बढ़ गई है।
परिवार का मानना है कि नोएडा या गाजियाबाद जाने से आत्मनिर्भरता और सुरक्षा दोनों मिल सकेंगे। भाई ने कहा कि वहां नौकरी के बेहतर मौके होंगे। अगर सरकार एक सदस्य को नौकरी दे दे तो बाकी निजी क्षेत्र में काम ढूंढ सकते हैं और बच्चों को अच्छी शिक्षा मिल सकेगी। अदालत के एक अन्य निर्देश पर बच्चों को हाल ही में स्थानीय केंद्रीय विद्यालय में दाखिला दिलाया गया है।
परिवार के आंगन में एक तुलसी का पौधा लगा है, जिसे पीड़िता ने खुद लगाया था। भाई ने बताया, यह घर में बहन की आखिरी याद है। हम रोज इसकी देखभाल करते हैं। 19 वर्षीय दलित युवती सितंबर 2020 में चार ऊंची जाति के आरोपियों द्वारा कथित हमले में गंभीर चोटों के कारण दम तोड़ गई थी। प्रशासन ने रात में परिवार की सहमति के बिना अंतिम संस्कार कर दिया था। मुकदमे में तीन आरोपी बरी हो गए जबकि एक को उम्रकैद की सजा हुई। परिवार अब नई जगह पर सामान्य जिंदगी जीने की आस लगाए बैठा है।