राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) में अच्छा प्रदर्शन करने वाले अलवर शहर को केंद्र सरकार की ओर से 20 करोड़ रुपये का तोहफा मिलने वाला है। इस राशि का उपयोग शहर की हवा को शुद्ध करने, धूल कम करने और हरियाली बढ़ाने के लिए किया जाएगा।
राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) में अच्छा प्रदर्शन करने वाले अलवर शहर को केंद्र सरकार की ओर से 20 करोड़ रुपये का तोहफा मिलने वाला है। इस राशि का उपयोग शहर की हवा को शुद्ध करने, धूल कम करने और हरियाली बढ़ाने के लिए किया जाएगा।
अलवर में बढ़ते प्रदूषण के ग्राफ को नीचे गिराने के लिए नगर निगम ने कमर कस ली है। केंद्र सरकार की राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) योजना के तहत अलवर नगर निगम को 20 करोड़ रुपये की राशि दी जाएगी। इस बजट का मुख्य उद्देश्य शहर में उड़ने वाली धूल को नियंत्रित करना और वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) में सुधार करना है।
उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम के पिछले सर्वे में पूरे देश में अलवर ने तीसरा स्थान हासिल किया था। नगर निगम प्रशासन का लक्ष्य इस बार अपनी रैंकिंग में और सुधार करना है। आयुक्त सोहन सिंह नरूका के अनुसार, पिछले साल भी इस योजना के तहत काफी काम हुए थे और चालू वित्तीय वर्ष के बजट में 20 करोड़ रुपये प्रस्तावित किए गए हैं। राशि प्राप्त होते ही टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
शहर में सबसे बड़ी समस्या टूटी सड़कें और उनसे उड़ने वाली धूल है। विशेष रूप से ट्रांसपोर्ट नगर क्षेत्र में धूल का गुबार सबसे अधिक रहता है। इसके अलावा:
हनुमान सर्किल से कला कॉलेज पुल: यहाँ दिनभर धूल के गुबार उठते हैं, जिससे राहगीरों और दुकानदारों को सांस लेना दूभर हो जाता है।
काली मोरी से रेलवे स्टेशन और एरोड्रम रोड: इन व्यस्त इलाकों में सड़क किनारे जमी मिट्टी वाहनों के गुजरते ही हवा में घुल जाती है।
भूगोर तिराहा: यहाँ भी धूल नियंत्रण के लिए विशेष कार्य किए जाएंगे।
प्रदूषण को काबू करने के लिए नगर निगम कई मोर्चों पर काम करेगा:
सड़क निर्माण: टूटी सड़कों की मरम्मत और डामरीकरण ताकि धूल न उड़े।
टाइल फिक्सिंग: सड़कों के किनारों (Interlocking Tiles) पर टाइलें लगाई जाएंगी ताकि कच्ची मिट्टी ढक जाए।
पौधरोपण: शहर के डिवाइडरों और खाली स्थानों पर सघन वृक्षारोपण किया जाएगा ताकि वे प्राकृतिक एयर फिल्टर का काम करें।
मैकेनाइज्ड स्वीपिंग: सड़कों की सफाई के लिए आधुनिक मशीनों का प्रयोग बढ़ाया जाएगा।
धूल के कारण न केवल अस्थमा और एलर्जी के मरीजों की संख्या बढ़ रही है, बल्कि सड़क किनारे स्थित सैकड़ों दुकानों के सामान पर भी मिट्टी की मोटी परत जम जाती है। इस बजट से होने वाले कार्यों से स्थानीय व्यापारियों और आम जनता को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।