कमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम बढ़ने का सीधा असर अब शहर के होटल-ढाबों और कैटरिंग व्यवसाय पर साफ नजर आने लगा है।
कमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम बढ़ने का सीधा असर अब शहर के होटल-ढाबों और कैटरिंग व्यवसाय पर साफ नजर आने लगा है। गैस महंगी होते ही अलवर में अधिकांश होटल संचालकों ने खाने के रेट बढ़ा दिए हैं। पहले 150 रुपए में मिलने वाली थाली अब 170 रुपए में मिल रही है, जबकि शादी-पार्टियों में कैटरिंग का खर्च करीब 100 रुपए प्रति प्लेट तक बढ़ गया है।
होटल और ढाबा संचालकों का कहना है कि गैस के बढ़ते दामों के कारण उनकी लागत लगातार बढ़ रही है। प्रति थाली करीब 20 रुपए तक खर्च बढ़ चुका है, लेकिन ग्राहक क्षमता को देखते हुए वे सीमित बढ़ोतरी ही कर पा रहे हैं। संचालकों का साफ कहना है कि अगर इससे ज्यादा रेट बढ़ाए गए, तो ग्राहक दूसरे विकल्प तलाशने लगेंगे।
रोड नंबर दो स्थित एक होटल के संचालक रोहित शर्मा ने बताया कि पहले 150 रुपए की थाली में रोटी, चावल, दाल, सब्जी, सलाद, रायता और मिठाई शामिल थी। अब वास्तविक लागत निकालने के लिए 40 रुपए तक बढ़ोतरी जरूरी है, लेकिन ग्राहक इतना भुगतान करने को तैयार नहीं हैं। इसी कारण फिलहाल 20 रुपए ही बढ़ाए गए हैं। उन्होंने बताया कि लागत कम करने के लिए अब तवे की जगह तंदूर की रोटी पर ज्यादा जोर दिया जा रहा है और कुछ आइटम्स के रेट भी बढ़ाए गए हैं।
रेलवे स्टेशन क्षेत्र के ढाबा संचालक विवेक मदान का कहना है कि उन्होंने भी 15 से 20 रुपए प्रति प्लेट बढ़ाए हैं। वे कैटरिंग का काम भी करते हैं, जहां खर्च 100 रुपए प्रति प्लेट तक बढ़ चुका है। इसके बावजूद ग्राहक बढ़े हुए रेट देने में हिचकिचा रहे हैं, जिससे मुनाफा कम हो गया है। उन्होंने बताया कि अब डीजल और कोयले से चलने वाली भट्टियों का उपयोग बढ़ाने की तैयारी की जा रही है, जबकि चाउमीन, चाट और तवा रोटी जैसे आइटम्स कम किए जा रहे हैं।
उधर, जिले में गैस सिलेंडरों की मांग और आपूर्ति के बीच भी अंतर बना हुआ है। 30 हजार सिलेंडरों की बुकिंग के मुकाबले 18 हजार सिलेंडर ही उपलब्ध हो पा रहे हैं। हालांकि, जिला रसद अधिकारी विनोद जुनेजा के अनुसार 4 से 5 दिन में सिलेंडर की आपूर्ति कर दी जाती है और कमर्शियल गैस की कोई कमी नहीं है। उल्लेखनीय है कि हाल ही में कमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम में करीब 993 रुपए की बढ़ोतरी हुई है, जिसका सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ रहा है।