सरिस्का टाइगर रिजर्व से बाघ बाहर निकल रहे हैं, उन्हें वापस लाने के लिए एनटीसीए व सरकार के आदेश का इंतजार है। सरिस्का के दो बाघ अभी रेंज से बाहर घूम रहे, उनके आबादी में जाने का खतरा भी कम नहीं है।
सरिस्का टाइगर रिजर्व से बाघ बाहर निकल रहे हैं। एक बाघ अलवर बफर रेंज से निकल किशनगढ़बास और खैरथल रेलवे पटरी तक पहुंच गया, वहीं एक दो साल से जयपुर के रामगढ़ के जंगल में घूम रहा है। जबकि एक बाघ दो साल से ज्यादा समय से लापता है। इन बाघों को वापस सरिस्का लाने के लिए राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) और राज्य सरकार के आदेश का इंतजार है।
सरिस्का में इन दिनों बाघों का कुनबा बढ़कर 31 तक पहुंच गया है। इनमें सात बाघ और शावक अलवर बफर रेंज तथा शेष सरिस्का में है। संख्या बढ़ने के कारण टैरिटरी के लिए बाघों के बीच आपसी संघर्ष की घटनाएं भी बढ़ी है, जिससे एक बाघ दूसरे को अपनी टैरिटरी से बाहर धकेल रहे हैँ। यही कारण है कि बाघ भटक कर जंगल से बाहर निकल रहे।
आबादी क्षेत्र में जाने का खतरा
सरिस्का से बाहर निकलने से बाघों के आबादी क्षेत्र की ओर रुख करने का भी खतरा है। पूर्व में अलवर बफर रेंज का बाघ जयसमंद बांध के आसपास कई दिनों तक रहा। वहीं यह बाघ अब किशनगढ़बास से होते हुए खैरथल तक पहुंच गया। इन क्षेत्रों के आसपास आबादी क्षेत्र है, जिससे बाघ आबादी क्षेत्र की ओर भी रूख कर सकता है। हालांकि पूर्व भी सरिस्का के बाघ आबादी क्षेत्र में पहुंच चुके हैं, लेकिन मानवीय हानि नहीं पहंचाई।
अनुमति मिले तो सुरक्षित जंगल में आए बाघ
सरिस्का से बाहर निकले बाघों को वापस सुरक्षित जंगल में लाने की जरूरत है। इन बाघों को रेस्क्यू कर वापस सरिस्का लाया जा सकता है, इसके लिए एनटीसीए एवं राज्य सरकार की अनुमति जरूरी है। अनुमति के इंतजार में सरिस्का के बाघ अभी बाहरी क्षेत्रों में ही घूम रहे हैं।
रणथंभोर की याद न हो जाए ताजा
रणथंभोर टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या 70 से ज्यादा है। इस कारण वहां बाघों के बीच संघर्ष की घटनाएं होती रही हैं। आपसी संघर्ष के कारण कई बाघ रणथंभोर के जंगल से बाहर निकल चुके हैं। हालांकि सरिस्का टाइगर रिजर्व में अभी बाघों की संख्या रणथंभोर से आधी से कम है, लेकिन यहां भी बाघों के सरिस्का से बाहर निकलने की घटनाएं बढ़ने लगी है।