शहर को एक और सैटेलाइट अस्पताल की सौगात मिल सकती है। स्वास्थ्य विभाग ने इसके लिए जिला प्रशासन को प्रस्ताव बनाकर भेज दिया है।
अलवर राज्य सरकार के आगामी वित्तीय वर्ष के बजट में अलवर शहर को स्वास्थ्य सुविधाओं के मोर्चे पर बड़ी राहत मिलने की संभावना है। शहर को एक और सैटेलाइट अस्पताल की सौगात मिल सकती है। स्वास्थ्य विभाग ने इसके लिए जिला प्रशासन को प्रस्ताव बनाकर भेज दिया है। प्रस्ताव के अनुसार जगन्नाथ मंदिर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) को क्रमोन्नत कर सैटेलाइट अस्पताल में बदला जाएगा। सैटेलाइट अस्पताल के भवन निर्माण पर करीब 10 करोड़ 21 लाख रुपए की लागत आने का अनुमान है। वर्तमान में अलवर शहर में काला कुआं क्षेत्र में एक सैटेलाइट अस्पताल संचालित है। यदि जगन्नाथ मंदिर पीएचसी को सैटेलाइट अस्पताल में तब्दील किया जाता है, तो शहर में सैटेलाइट अस्पतालों की संख्या बढ़कर दो हो जाएगी।
जगन्नाथ मंदिर पीएचसी शहर के पुराने इलाके में संचालित है, जहां प्रतिदिन 100 से 200 मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। इस पीएचसी के आसपास के क्षेत्र की जनसंख्या करीब 55 से 60 हजार है, लेकिन पास में कोई बड़ा चिकित्सा संस्थान उपलब्ध नहीं है। इस कारण मरीजों को इलाज के लिए या तो काला कुआं सैटेलाइट अस्पताल या फिर जिला अस्पताल जाना पड़ता है। जगन्नाथ मंदिर पीएचसी परिसर में सैटेलाइट अस्पताल के संचालन और पार्किंग के लिए भी पर्याप्त जगह उपलब्ध है। ऐसे में यहां सैटेलाइट अस्पताल खुलने से मरीजों को स्थानीय स्तर पर ही बेहतर और सुलभ इलाज मिल सकेगा।
स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार की कड़ी में मालाखेड़ा पंचायत समिति मुख्यालय पर संचालित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) के लिए भी बड़ी पहल की गई है। वर्तमान में सीएचसी का भवन जर्जर अवस्था में है। स्वास्थ्य विभाग ने 832 लाख रुपए की लागत से नवीन भवन निर्माण का प्रस्ताव बनाकर भेजा है। नए भवन में सीएचसी का संचालन होने से मरीजों के साथ-साथ चिकित्सा स्टाफ को भी बड़ी राहत मिलेगी और यहां उपलब्ध स्वास्थ्य सेवाओं में विस्तार किया जा सकेगा।
स्वास्थ्य विभाग ने बगड़ तिराहा क्षेत्र में नए ट्रॉमा सेंटर की स्वीकृति के लिए भी प्रस्ताव भेजा है। विभागीय मानकों के अनुसार ट्रॉमा सेंटर के भवन निर्माण की अनुमानित लागत 220 लाख रुपए बताई जा रही है।बगड़ तिराहा अलवर-भरतपुर हाइवे, अलवर-रामगढ़-फिरोजपुर हाइवे और दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस वे के लिंक रोड के बीच स्थित है। इस कारण यहां ट्रॉमा सेंटर की मांग लंबे समय से की जा रही है। ट्रॉमा सेंटर के संचालन से सड़क हादसों में घायल मरीजों को गोल्डन ऑवर में गुणवत्तापूर्ण इलाज मिल सकेगा, जिससे कई जानें बचाई जा सकेंगी।