अलवर

वर्षों पहले चली वाहिनियां सड़कों से कहां हो गई गायब? अब क्यों नहीं देती दिखाई…

सार्वजनिक परिवहन सेवा के लिए 13 साल पहले शुरू की गई मिनी बस सेवा दम तोड़ चुकी है। इसमें चालक सहित आठ लोगों के बैठने की क्षमता थी।

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Mar 31, 2025

अलवर शहर में सार्वजनिक परिवहन सेवा के लिए 13 साल पहले शुरू की गई मिनी बस सेवा दम तोड़ चुकी है। नई यातायात प्रणाली विकसित नहीं होने से जनता को निजी वाहनों में महंगा सफर करना पड़ रहा है। शहर व ग्रामीण इलाकों को ई-बसों से जोड़ने का प्लान भी अब तक धरातल पर नहीं आ पाया। विशेषज्ञों का कहना है कि प्रदूषण कम करने के लिए जरूरी है कि ई-बस सेवा शहर में शुरू हो।

लोगों के बैठने की क्षमता थी

शहर में बढ़ती मांग को देखते हुए 3 दिसंबर, 2011 को अलवर में एक मिनीबस यात्री सेवा शुरू की गई। उसके बाद 58 वाहनों का बेड़ा उतारा गया। चालक सहित आठ लोगों के बैठने की क्षमता थी। निजी वाहनों के कारण सड़कों पर होने वाली भीड़भाड़ को कम करने के विचार से शुरू की गई।

यह परियोजना क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (आरटीओ), पंजाब नेशनल बैंक, शहरी सुधार ट्रस्ट (यूआईटी), यूआईटी भिवाड़ी और उप रजिस्ट्रार सहकारी समितियों जैसे विभिन्न संगठनों का एक संयुक्त प्रयास था। जिसमें प्रत्येक एजेंसी की भूमिका स्पष्ट रूप से परिभाषित थी। पूरी परियोजना निजी तौर पर वित्तपोषित थी। योजना के तहत 1310 वाहिनियां चलाई गई थी।

इन रूटों पर चलाई गई मिनी बसें

13 साल पहले मिनी बस सेवा मनु मार्ग, रघु मार्ग, नारू मार्ग, बाईपास रोड, दिल्ली रोड, मंगल मार्ग, विनय मार्ग, जयपुर रोड, तिजारा रोड, राजगढ़ रोड पर शुरू की गई। इसके लिए 20 बस स्टॉपेज बनाए गए थे। कुछ समय यह सेवा चलती रही, लेकिन बाद में धीरे-धीरे यह व्यवस्था दम तोड़ती गई।

ये बनाया गया था ढांचा

इस योजना के लिए चालकों को प्रशिक्षण दिया गया। वर्दी दी गई। पहचान पत्र, समूह बीमा किया गया था। इसके अलावा 20 आधुनिक बस स्टॉप, साइनेज, 45 हाई मास्ट लाइटें, ट्रैफिक सिग्नल, पूरे शहर में यातायात निगरानी के लिए 25 सीसीटीवी लगाए गए थे। एक उन्नत पुलिस नियंत्रण कक्ष खोला गया। अब बस स्टॉपेज धूल फांक रहे हैं। कुछ जगह जर्जर हो गए हैं।

महिलाओं के लिए भी अलग से चली थी वाहिनी

महिलाओं की आजीविका को बढ़ाने और महिला यात्रियों को सुरक्षित यात्रा विकल्प प्रदान करने के लिए जनवरी, 2012 में ही महिला अलवर वाहिनी तीन की शुरुआत भी की गई थी। इस योजना के तहत वाहनों में महिला चालक लगाई गईं। इसके अलावा शहर में टैक्सी सेवा नहीं थी, वह भी उसी समय शुरू की गई जो 24 घंटे चलती थी। अलवर वाहिनी हेल्पलाइन के माध्यम से वाहन के लिए कॉल किया जाता था, जो अब व्यवस्था खत्म हो गई।

अब बनाई जा रही यह योजना

ई-बसें चलाने के लिए तैयारी चल रही है। यह कार्य प्रधानमंत्री-इलेक्ट्रिक बस सेवा योजना के तहत होगा। बताया जा रहा है कि चिकानी से बुर्जा वाया चिरखाना, कटोरीवाला, छठी मील, टेल्को सर्किल, एसएमडी सर्किल, जेल चौराहा, भगत सिंह सर्किल, मिनी सचिवालय, भूगोर बायपास से 7 बसें 30 फेरे लगाएंगी। वहीं, कालीमोरी फाटक से अकबरपुर वाया एसएमडी सर्किल, उमरैण, घोड़ाफेर चौराहा, ढाई पैड़ी से 7 बसें 30 फेरे लगाएंगी। योजना बन रही है, लेकिन धरातल पर नहीं आ पा रही है।

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Updated on:
31 Mar 2025 01:09 pm
Published on:
31 Mar 2025 01:07 pm
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