बैंगलोर

विनीत शिष्य बनें

अनुशासन में रहकर गुरु के संकेत-आज्ञानुसार, विनय विवेक पूर्वक प्रवृत्ति करता है वह विनीत शिष्य गुरु का प्रिय होता है।

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विनीत शिष्य बनें

बेंगलूरु. हनुमंतनगर जैन स्थानक में साध्वी सुप्रिया ने गुरुवार को प्रवचन में उत्तराध्ययन सूत्र का विवेचन करते हुए कहा कि जो शिष्य सम्पदा समाधि में सहायक गुरु को सहायता करते हैं।

जो अनुशासन में रहकर गुरु के संकेत-आज्ञानुसार, विनय विवेक पूर्वक प्रवृत्ति करता है वह विनीत शिष्य गुरु का प्रिय होता है।

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उन्होंने कहा कि अविनीत शिष्य को दुष्ट, उदण्ड बैल की उपमा से उपमित किया गया है। जो गुरु की आज्ञा के विपरित कार्य करता है, गुरु के अनुशासन की अवहेलना करता है, कटु वचन बोलने वाला, असहिष्णु, प्रमादी, आलसी, गुरु की अवज्ञा करता है, गुरु की निंदा करता है, गुरु को हर समय दुखी करने का प्रयास करता है वह अविनीत शिष्य होता है।

साध्वी ने कहा कि ज्ञान, दर्शन, चारित्र तप मोक्ष के मार्ग है। वस्तु का सामान्य बोध ज्ञान है और विशेष बोध दर्शन कहलाता है।

साध्वी सुमित्रा ने मंगलपाठ प्रदान किया। साध्वी सुविधि ने उत्तराध्ययन सूत्र का वांचन किया। सभा में नेमीचंद खिंवसरा, कल्याणसिंह बुरड़, अशोक कुमार गादिया, नेमीचंद दक, महावीर चंद बुबकिया, अशोक भिलवाडिय़ा आदि उपस्थित रहे।

संचालन सहमंत्री सुरेश कुमार धोका ने किया।

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Published on:
02 Nov 2018 07:08 pm
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