आज्ञा बंधन नहीं, अपितु आत्मा की सुरक्षा है।
बेंगलूरु. शांतिनगर जैन श्वेताम्बर मूर्तिपूजक संघ में आचार्य महेंद्र सागर सूरी ने कहा कि आज बहुत लोगों को प्रभु की आज्ञा बंधन रुप लगी है परंतु यह उनकी अज्ञानता है।
आज्ञा बंधन नहीं, अपितु आत्मा की सुरक्षा है। यूं दिखने में आज्ञा बंधन रूप दिखती होगी, पर उसी में आत्मा की सुरक्षा रही है।
मोह के स्वच्छंद प्रसार को रोकने के लिए अनादि के कुसंस्कारों को नियंत्रित करने के लिए और कर्मप्रवाह से बचने के लिए नियमन भी आवश्यक है।
उत्तराध्ययन सूत्र में समस्त आगमों का सार
मैसूरु. वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ सिद्धार्थनगर स्थित सीआइटीबी परिसर में श्रुत मुनि व अक्षर मुनि ने उत्तराध्ययन सूत्र का पाठ करते हुए कहा कि समस्त आगमों का सार यदि किसी शास्त्र में हो तो वह उत्तराध्ययन सूत्र है।
इसके अंतर्गत भव जीवों को धर्म की पावन देशना बताई है। साधु को पंच महाव्रत धारी बताया गया है। पांच महाव्रत की स्वीकार करते हैं एवं दीक्षा सयंम को अंगीकार करते हैं वह जैन संत कहलाते हैं।
दिन में प्रभु महावीर की स्तुति पुच्छीसुण्णं के सामूहिक जाप अनुष्ठान में महिलाओ ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। 11 नवंबर को गुरु गणेशीलाल की जयंती मनाई जाएगी।