यह पुनवाणी होती है तभी हमें जिनवाणी सुनने को मिलती है।
बेंगलूरु. वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ चिकपेट शाखा के तत्वावधान में गोडवाड़ भवन में उपाध्याय प्रवर रविंद्र मुनि के सान्निध्य में रमणीक मुनि ने कहा कि उत्तराध्ययन सूत्र की वाचना को श्रवण करने से हमें अपने प्राणों, कानो व अंत: करण का संबंध स्थापित करने का सुयोग्य अवसर प्राप्त हुआ है।
यह पुनवाणी होती है तभी हमें जिनवाणी सुनने को मिलती है। किसी भी कार्य को करने से पहले उसका बोध होना जरूरी है, भूल क्या हो रही है, उसका ज्ञान होना जरूरी है। भूल का बोध होते ही उस भूल के सुधार में व्यक्ति प्रयास करना प्रारंभ कर देता है।
प्रारंभ में उपाध्याय प्रवर रविंद्र मुनि ने मंगलाचरण किया। रमणीक मुनि ने ओंकार का सामूहिक उच्चारण कराया। ऋषि मुनि ने पुछिसुन्न गीत का सामूहिक वाचन कराया व उत्तरायण सूत्र के मूल पाठ व गीतिका सुनाई।
महामंत्री गौतमचंद धारीवाल ने बताया कि गोड़वाड़ भवन में रविंद्र मुनि की निश्रा में रमणीक मुनि का 52वां जन्मदिवस शुक्रवार की शाम को गौतम स्वामी जाप के साथ मनाया जाएगा।