
Banswara Nagar Nikay Chunav 2026: बांसवाड़ा नगर निकाय चुनाव के दावेदारों के फाइनल नाम बाहर आने में अब कुछ घंटे ही शेष हैं। भाजपा और कांग्रेस के पदाधिकारी जयपुर से लौट आए हैं, वहीं बीएपी के नाम भी पैनल की ओर से लगभग तय हैं, लेकिन सांसद का इंतजार किया जा रहा है।
अब निकाय चुनाव की दावेदारी में मात्र दो दिन शेष हैं। भाजपा, कांग्रेस और भारत आदिवासी पार्टी (बीएपी) के उम्मीदवारों की घोषणा शनिवार को हो सकती है। सोमवार को नामांकन का अंतिम दिन है।
सभापति की कुर्सी इस बार एसटी आरक्षित होने के कारण चुनावी समीकरण बदले हुए हैं। भाजपा और कांग्रेस दोनों ही जहां नगर परिषद में अपना बोर्ड बनाने को उत्सुक हैं तो वहीं बीएपी भी इस बार दौड़ में पीछे नहीं रहना चाहती है।
राजनीतिक दलों ने करीब दो माह से फील्ड में तैयारी शुरू कर दी थी। बूथ लेवल तक कार्यकर्ताओं की टीम तैयार की गई। सर्वे भी कराया गया है। वोटों की सेंधमारी में पार्टियां अभी से जुट गई हैं। साथ ही तीनों पार्टियां टिकट नहीं मिलने की स्थिति में बागी दावेदारों में सेंधमारी के मद्देनजर भी संभावित उम्मीदवारों के नामों को रोके हुए हैं।
नगर परिषद् में इस बार अध्यक्ष पद के लिए एसटी ऑपन सीट की लॉटरी खुली है। एसटी ओपन के लिए छह वार्ड हैं। वहीं, एसटी महिला के लिए 3 वार्ड आरक्षित हैं। ऐसे में बांसवाड़ा शहर के वार्ड संख्या 1, 3, 16, 17, 46, 55 एवं महिला एसटी के वार्ड संख्या 2, 15, 34 में से एसटी प्रत्याशी जीतकर आएंगे। इन सीटों पर भाजपा-कांग्रेस के साथ ही बीएपी ने पूरा दमखम लगाया है। अन्य वार्डों पर भी बीएपी की नजर है, जिससे मुकाबला त्रिकोणीय बना हुआ है।
बीएपी की ओर से चयनकर्ता पैनल तय है। राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य हेमंत राणा, निवर्तमान सरपंच, हम्मीरपुरा राकेश रावत, पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष गणेश डामोर, संभाग कोषाध्यक्ष डॉ. एलसी मईड़ा, जिलाध्यक्ष प्रभूलाल बुझ सहित बागीदौरा विधायक एवं प्रभारी जयकृष्ण पटेल हैं। हालांकि प्रत्याशियों का खुलासा सांसद की अंतिम मुहर लगने के बाद ही होगा। बीएपी की नजर भाजपा और कांग्रेस के बागी उम्मीदवारों पर भी है।
यहां अंतिम बार 2004 में एसटी वर्ग से कृष्णा कटारा सभापति बनी थीं। इसके बाद 2009 के चुनाव में ओबीसी से राजेश टेलर, 2014 में सामान्य महिला सीट पर मंजूबाला पुरोहित एवं 2019 में सामान्य वर्ग से जैनेंद्र त्रिवेदी सभापति बने थे। उनके कार्यकाल के बाद 2 साल से आयुक्त प्रशासक के तौर पर काम संभाल रहे थे।