- शोभायात्रा के साथ पदयात्रा संघ रवाना...- 10 किलोमीटर बाद प्रथम पड़ाव, प्रवचन में बताई छ:रिपालित नियमों की महता
चौहटन. मुनि मनोज्ञसागर की पावन निश्रा एवं साध्वी मंडल के सान्निध्य में लंबे काफिले के रूप में गुरुवार को शांतिनाथ जिनालय से ब्रहमसर तीर्थ (जैसलमेर) के लिए पदयात्रा संघ कस्बे से रवाना हुआ। शोभायात्रा में सजे-धजे हाथी-घोड़े और परमात्मा के सुसज्जित रथ सहित सैकड़ों मंगलकलश धारी युवतियां और बालिकाएं, रंग-बिरंगे परिधानों में सैकड़ों महिलाएं और धर्मावलंबी, विशेष वेशभूषा में मणिधारी युवा मंडल के दर्जनों युवा, जैन पताकाएं लहराते बालक-बालिकाओं का हुजूम, पंचरंगी साफा धारण किए संघपति पदयात्रा संघ की शोभा बढ़ा रहे थे। पदयात्रा के संयोजक डॉ. मोहनलाल डोसी ने बताया कि शोभायात्रा कस्बे में पाश्र्वनाथ जिनालय, श्रीजिनकुशल दादाबाड़ी होते हुए 10 किलोमीटर की पदयात्रा संपन्न करके प्रथम पड़ाव तक पहुंची। 19 दिवसीय पदयात्रा संघ को रवाना करने के दौरान आयोजित शोभायात्रा कस्बे के मुख्य मार्गों, मुख्य बाजार से गुजरते हुए रामसर रोड की तरफ प्रस्थान किया। शोभायात्रा का कस्बे में कई स्थानों पर पुष्पवर्षा से स्वागत किया गया। मुनि ने पदयात्रा का औचित्य, महत्व और पालित नियमों की जानकारी देते हुए उपस्थित जनसमुदाय से कहा कि सभी लोग छ:रिपालित नियमों को अपने जीवन में धारण करते हुए उनकी अक्षरश: पालना करें। इन नियमों की पालना करने एवं अनुगामी बनने से ही परमपद की प्राप्ति होगी। साथ ही इस पदयात्रा की सार्थकता सिद्ध होगी। साध्वी विमलप्रभा ने कहा कि इतने भव्य पदयात्रा संघ में सहभागी बनकर अपने भीतर के कषायों को समाप्त करें। पदयात्रा के संयोजक डॉ. मोहनलाल डोसी ने बताया कि शोभायात्रा कस्बे में पाश्र्वनाथ जिनालय, श्रीजिनकुशल दादाबाड़ी होते हुए 10 किलोमीटर की पदयात्रा संपन्न करके प्रथम पड़ाव तक पहुंची। इस मौके नवकारसी लाभार्थी गौतमचंद मोहनलाल भंसाली परिवार का समिति की ओर से अभिनंदन किया गया।सजे-धजे हाथी-घोड़े और परमात्मा के सुसज्जित रथ सहित सैकड़ों मंगलकलश धारी युवतियां और बालिकाएं, रंग-बिरंगे परिधानों में सैकड़ों महिलाएं और धर्मावलंबी, विशेष वेशभूषा में मणिधारी युवा मंडल के दर्जनों युवा, जैन पताकाएं लहराते बालक-बालिकाओं का हुजूम, पंचरंगी साफा धारण किए संघपति पदयात्रा संघ की शोभा बढ़ा रहे थे।