Bastar News: छत्तीसगढ़ के बस्तर में नक्सल प्रभावित जिलों के अंतिम गांव को वाइब्रेंट विलेज के रूप में डेवलप किया जाएगा।
Bastar News: छत्तीसगढ़ के बस्तर में नक्सल प्रभावित जिलों के अंतिम गांव को वाइब्रेंट विलेज के रूप में डेवलप किया जाएगा। जहां सरकार के मंत्री-विधायक और आला अधिकारी जाकर रात में रुककर वहां के लोगों के साथ चर्चा कर उनकी दिनचर्या और जीवनशैली के बारे में जान सकेंगे।
व्राइबेंट विलेज में शासन के आला अधिकारी यदि रात रुकेंगे तो वहां के स्थानीय रहवासियों के साथ-साथ जिले के लोगों को लगेगा कि सरकार उनके साथ खड़ी है। नक्सल समस्या से जूझ रहे लोगों को मानसिक रूप से संबल प्रदान करने के लिए ही सरकार वाइब्रेंट विलेज की अवधारणा लेकर आ रही है। इससे व्राइबेंट विलेज में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।
सूत्रों के अनुसार बस्तर में वाइब्रेंट विलेज अवधारणा के तहत पारंपरिक आदिवासी संस्कृति, मिट्टी-लकड़ी के घरों, और स्थानीय कला (गोहरी कला) को संरक्षित करते हुए पारिस्थितिक पर्यटन (इको -टूरिज्म) को बढ़ावा दिया जा रहा है। बीजापुर और धुड़मारस जैसे गांव इसके प्रमुख उदाहरण हैं, जहां सामुदायिक भागीदारी से विकास, स्थानीय रोजगार और प्रकृति के बीच जीवनशैली का अनूठा संगम देखने को मिलता है।
सांस्कृतिक संरक्षण : बस्तर के भीतरी इलाकों में आदिवासी जीवन, उनकी परंपराओं, मान्यताओं और सामुदायिक संस्कृति को संरक्षित किया जाना।
ईको-टूरिज्म : धुड़मारस जैसे गांवों को ईको-टूरिज्म डेस्टिनेशन के रूप में विकसित किया गया है, जहां पर्यटकों को स्थानीय व्यंजनों और कला का अनुभव मिलता है।
सतत विकास : आधुनिक सुविधाओं के साथ ही पारंपरिक आवास (मिट्टी-लकड़ी के घर) और प्रकृति के साथ संतुलन बनाए रखा जा रहा है।
रोजगार के अवसर : स्थानीय युवाओं को ईको-टूरिज्म और होमस्टे के माध्यम से रोजगार के नए अवसर मिल रहे हैं।
सामुदायिक भागीदारी : यह मॉडल स्थानीय आदिवासी समुदाय की सक्रिय भागीदारी पर आधारित है।
छत्तीसगढ़ शासन गृहमंत्री विजय शर्मा ने कहा की नक्सल प्रभावित जिले के अंतिम छोर के गांवों को वाइब्रेंट विलेज के रूप में विकसित किया जाएगा। इन गांवों में अधिकारियों को साल में एक बार रात गुजारने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा ताकि ग्रामवासियों को लगे कि नक्सल समस्या का अब कोई डर नहीं है क्योंकि शासन-प्रशासन भी उनके साथ है।