बेतुल

283 करोड़ की लागत से बन रहे बांध का 95 प्रतिशत काम पूरा

चीफ इंजीनियर ने किया पारसडोह बांध का निरीक्षण

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Jul 14, 2018
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मुलताई. मुलताई अनुविभाग के पचधार के समीप ताप्ती नदी पर 335 करोड़ से बनने वाले पारसडोह बांध का लगभग 95 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है, जल संसाधन विभाग के चीफ इंजीनियर राकेश अग्रवाल बांध के निर्माण कार्य का निरीक्षण करने पहुंचे, उनके साथ ईई सहित अन्य अधिकारियों ने बचे काम को जल्द पूरा करने का कहा। बताया जा रहा है बांध में नदी के तल से लगभग दस मीटर ऊंचाई तक पानी बांध में रूक चुका है। अभी लगभग 15 मीटर ऊंचाई तक पानी और भरा जाना शेष है, इसी साल बांध को पूरा भर लिया जाएगा, क्षेत्र का यह अब तक का सबसे बड़ा बांध है। पारसडोह मध्यम उद्वहन सिंचाई परियोजना के तहत पारसडोह बांध का निर्माण कार्य अब अंतिम चरण में है। इस साल बारिश में यह बांध पानी से लबालब हो जाएगा, शुरूआती बरसात के बाद ही बांध में पानी का भराव प्रारंभ हो चुका है। जल संसाधन विभाग के चीफ इंजीनियर राकेश अग्रवाल, ईई जीपी सिलावट, सब इंजीनियर सीबी पाठेकर, सब इंजीनियर एस नागले ने बांध का निरीक्षण किया। चीफ इंजीनियर राकेश अग्रवाल ने विभाग के अधिकारियों को बचा हुआ काम जल्द से जल्द पूरा करने के आदेश दिए हैं। उन्होंने बताया कि बांध में फिलहाल 624.82 के लेबल तक पानी का भराव हो चुका है, बांध का फुल टैंक लेबल 639.10 है। चीफ इंजीनियर राकेश अग्रवाल ने बनाए सभी 6 गेट देखे और अन्य कामों को देखा। उन्होंने बताया कि पारसडोह बांध में जलग्रहण क्षेत्र 588.50 वर्ग मीटर है। बांध की कुल भराव क्षमता 72.73 मिलियन क्यूबिक मीटर है, ऐसे में वाष्पीकरण हास एवं अन्य हास होने के बाद बांध से 61.12 मिलयिन क्यूबिक मीटर जल क्षमता सिंचाई एवं अन्य प्रयोजन हेतु उपलब्ध होगी। पारसडोह से सिंचाई के साथ-साथ 3.40 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी पेयजल एवं 2.40 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी पर्यावरण हेतु छोडऩे का प्रस्ताव लिया है। इधर करोड़ों की लागत से बन रहा पारसडोह बांध बनने को तैयार है, लेकिन विस्थापित किए दो गांवों के लोगों का विस्थापन का काम अभी अधर में है। हालत यह है कि मकानों तक जाने के रास्ते कच्चे पड़े हंै।

लिफ्ट ऐरिगेशन से होगा किसानों को फायदा- बांध में क्योंकि अभी नहर का निर्माण नहीं हो पाया है, ऐसे में बांध बनने और जल भराव होने से किसानों को गेहंू की फसल के लिए पानी मिल पाएगा, किसान मोटर पंप के माध्यम से पानी लेकर सिंचाई कर पाएंगे। अग्रवाल ने बताया कि मुलताई, पट्टन एवं आठनेर के अंतर्गत 9990 हेक्टेयर कृषि भूमि में रबी की सिंचाई होगी, वहीं 3350 हेक्टेयर कृषि भूमि में खरीफ सिंचाई होगी। वहीं कुल वार्षिक 13340 हेक्टयर भूमि में सिंचाई की सुविधा उपलब्ध रहेगी।

Published on:
14 Jul 2018 12:04 pm
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