बैठक में हुई निर्माण कार्यों की समीक्षा, गंज मंडी काम्प्लेक्स के धीमी गति से चल रहे निर्माण कार्य को लेकर भी दिखी नाराजगी। बैतूल। नगरपालिका में विकास कार्यों की रफ्तार थमने की असली वजह शुक्रवार को लोक निर्माण, विद्युत एवं यांत्रिकी समिति की बैठक में सामने आई। नए एसओआर (शेड्यूल ऑफ रेट) के लागू होने […]
बैतूल। नगरपालिका में विकास कार्यों की रफ्तार थमने की असली वजह शुक्रवार को लोक निर्माण, विद्युत एवं यांत्रिकी समिति की बैठक में सामने आई। नए एसओआर (शेड्यूल ऑफ रेट) के लागू होने की प्रक्रिया के चलते करीब 30 करोड़ रुपए के डेढ़ सैकड़ा से अधिक निर्माण कार्य पेंडिंग पड़े हुए हैं। टेंडर होने के बावजूद इन कार्यों की तकनीकी स्वीकृति (टीएस) जारी नहीं हो सकी है। बैठक में बताया गया कि पुराने एसओआर पर स्वीकृत टेंडरों की टीएस अब नए एसओआर रेट के आधार पर पुन: रिवाइज की जाएगी। इस प्रशासनिक प्रक्रिया ने न केवल विकास कार्यों को रोक दिया है, बल्कि शहर की बुनियादी सुविधाओं पर भी सीधा असर डाल दिया है। बैठक में नपाध्यक्ष पार्वती बाईबारस्कर, उपाध्यक्ष महेश राठौर, सभापति विकास प्रधान, सीएमओ सतीश मटसेनिया सहित सदस्यगण एवं नपा कर्मचारीगण उपस्थित थे।
बैठक में बताया गया कि नगरपालिका का नया एसओआर (शेड्यूल ऑफ रेट) लागू होने वाला है। इसी वजह से पूर्व में स्वीकृत सभी टेंडरों के तकनीकी स्वीकृति (टीएस) पुन: रिवाइज कर भेजे जाएंगे। नए एसओआर रेट के आधार पर ही अब टीएस जारी होगी। इस प्रक्रिया के कारण करीब 30 करोड़ रुपए के डेढ़ सौ से अधिक निर्माण कार्य फिलहाल ठंडे बस्ते में पड़े हुए हैं। सवाल यह है कि यदि एसओआर बदलने की जानकारी पहले से थी, तो टेंडर प्रक्रिया क्यों पूरी की गई? क्या यह प्रशासनिक दूरदर्शिता की कमी नहीं है, जिसका खामियाजा शहरवासियों को भुगतना पड़ रहा है?
ठेकेदारों के भुगतान का मामला भी उठा
इधर, बैठक में ठेकेदारों को भुगतान नहीं होने का मुद्दा भी गंभीर रूप से उठा। बताया गया कि ई-नगरपालिका 2.0 पोर्टल में तकनीकी कार्य चलने के कारण पेमेंट का विकल्प बंद है। परिणामस्वरूप पहले से पूर्ण किए गए कार्यों का भुगतान अटक गया है। इससे ठेकेदारों में असंतोष है और नए कार्य शुरू करने में वे रुचि नहीं दिखा रहे। यह स्थिति न केवल विकास कार्यों को प्रभावित कर रही है, बल्कि नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर रही है।
काम्प्लेक्स निर्माण में लेटलतीफी पर नोटिस
गंज मंडी काम्प्लेक्स का मामला भी बैठक में चर्चा का केंद्र रहा। ठेकेदार द्वारा नीचे की दुकानों को छोडकऱ ऊपर के हिस्से में काम करने पर नपाध्यक्ष पार्वती बाईबारस्कर ने नाराजगी जताई और ठेकेदार को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि पहले विस्थापितों को आवंटित की जाने वाली दुकानों का निर्माण प्राथमिकता से पूरा किया जाए। उल्लेखनीय है कि नपाध्यक्ष पहले भी निरीक्षण के दौरान काम की धीमी गति पर आपत्ति जता चुकी हैं, लेकिन इसके बावजूद हालात जस के तस बने हुए हैं।
निर्माण योजनाओं की समीक्षा हुई
बैठक में मुख्यमंत्री अधोसंरचना, कायाकल्प अभियान, विद्युतीकरण सहित अन्य योजनाओं के अंतर्गत चल रहे कार्यों की भी समीक्षा की गई। सभापति विकास प्रधान ने समय-सीमा में गुणवत्तापूर्ण कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए। अमृत 2.0 के तहत प्रस्तावित सिवरेज प्रोजेक्ट को लेकर भी लंबी चर्चा हुई। आगामी छह माह में काम शुरू होने की संभावना जताई गई, लेकिन इससे पहले सडक़ निर्माण को लेकर निर्णय लिया गया कि सीसी सडक़ की बजाय डामरीकृत सडक़ें बनाई जाएं, ताकि पाइपलाइन बिछाने के दौरान नुकसान कम हो।
शहर में ई चार्जिंग स्टेशन बनाने का निर्णय
जवाहर वार्ड प्राथमिक स्कूल के आसपास गुमठियों को लेकर यह तय हुआ कि नपा स्थायी रूप से 30 से 40 शेडनुमा दुकानें बनाकर उन्हें आवंटित करे। इससे एक ओर अतिक्रमण की समस्या से निजात मिलेगी, वहीं दूसरी ओर नपा को अतिरिक्त आय भी होगी। इसके अलावा शहर में बढ़ते ई-वाहनों को देखते हुए चार से पांच स्थानों पर ई-चार्जिंग स्टेशन बनाने पर सहमति बनी। कुल मिलाकर बैठक ने यह स्पष्ट कर दिया कि योजनाओं की कोई कमी नहीं है, लेकिन क्रियान्वयन में ढिलाई, तकनीकी अड़चनें और प्रशासनिक निर्णयों में देरी विकास की राह में सबसे बड़ी बाधा बन रही हैं। यदि इन समस्याओं का समय रहते समाधान नहीं किया गया, तो शहर का विकास केवल फाइलों और बैठकों तक ही सिमटकर रह जाएगा।