
Bharatpur : भरतपुर. सत्ताधारी पार्टी के पूर्व विधायक अतर सिंह भड़ाना की हत्या का मामला किसी एक गांव की कहानी नहीं है, बल्कि खनन के कारोबार में हिस्सेदारी की चाहत का भी परिणाम है। जिस लीज को भड़ाना 2 वर्ष पहले तक चला रहे थे। यह लीज वर्ष पांच से छह करोड़ रुपए का मुनाफा देती रही है। यही मुनाफे का खेल वर्षों तक कभी हिस्सेदारों तो कभी गांव के किसी एक गुट के लिए विवाद कारण बनता रहा है। पुलिस इस एंगल पर भी जांच करने में जुटी है कि आखिर इतने वर्षों तक धरना-प्रदर्शन व कानूनी लड़ाई लड़ने में सहयोग किस-किस माध्यम से मिल रहा था। संभव है कि इस झगड़े को भड़काने में किसी ना किसी का सहयोग रहा हो। चूंकि अब तक की पुलिस की पड़ताल में सामने आया है कि गांव भौंडा के ग्रामीणों की किसी को भी मारने की योजना नहीं थी, वह सिर्फ भड़ाना को लीज शुरू करने रोकना चाहते थे। अचानक से झगड़े ने इतना विकराल रूप धारण कर लिया, यह अब पुलिस की जांच का विषय बना हुआ है।
बताते हैं कि घटना से चार दिन पहले ग्रामीणों के पास दो दर्जन से अधिक नई टॉर्च आई थी, जो कि स्थानीय स्तर पर पड़ताल करने पर सामने आया कि भरतपुर, वैर, भुसावर, महुआ से खरीदी नहीं गई, बल्कि वह कहीं बाहर से किसी ने भेजी थी। कुछ लोग चार दिन देर रात तक इन टॉर्चों की रोशनी बार-बार लीज एरिया में डाल रहे थे। ताकि लीज के काम शुरू करने को लेकर भड़ाना गुट को लगे कि अब भी रोष व्याप्त है। यह लोग चार-पांच दिन रात-रात भर लीज एरिया के आसपास गश्त कर रहे थे।
पूर्व विधायक कमलेश भड़ाना की पत्नी ने एफआइआर में जिस विजय सिंह का जिक्र किया है, वह भी पुलिस के लिए इस प्रकरण में अहम कड़ी माना जा रहा है। हालांकि एफआइआर में उसे स्थानीय बताया है, लेकिन जानकारी में आया कि वह दिल्ली का है। पिछले कुछ वर्ष पहले तक वह पूर्व विधायक भड़ाना का ही खास रहा है और उनके काम में साथ देता रहा है। कुछ समय बाद दोनों के बीच अनबन हो गई और उसने काम छोड़ दिया।
पूर्व विधायक अतर सिंह भड़ाना के समधी संजीव सिंह ने बताया कि विजय सिंह का नाम का व्यक्ति स्थानीय नहीं है। एक दिन पहले ही मालूम हुआ है कि एफआइआर में उसका निवास स्थान गलत लिखा गया है। वह दिल्ली का बताया गया है। विरोध करने वालों को भी उसकी ओर से फंडिंग करने की भी बात सामने आई है। फिलहाल तेरहवीं होने तक पुलिस अधिकारियों को मना कर दिया है कि पूरा परिवार अभी सदमे में है। उसके बाद ही बात करेगा। तेरहवीं के बाद खुद परिवार के साथ जाएंगे और पुलिस अधिकारियों के सामने हर साक्ष्य व एंगल पर पक्ष रखा जाएगा।
गांव भौंड़ा में आए गुर्जर नेताओं के सामने भी ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा है कि इस पूरे प्रकरण की गंभीरता के साथ जांच होनी चाहिए। साथ ही अगर कोई दोषी है तो उसे सजा मिलनी चाहिए। कुछ लोगों की गलती का खामियाजा पूरे गांव को भुगतने नहीं देना चाहिए। ग्रामीणों का कहना है कि किसी भी निर्दोष को सजा नहीं मिलनी चाहिए।
जरूरी है कि खनन क्षेत्रों में हर छह महीने में अधिकारियों, ग्रामीणों और पट्टाधारकों की संयुक्त बैठक आयोजित कर विवादों का समाधान किया जाए। सवाल है कि सरकार पट्टे देकर राजस्व तो वसूल रही है, लेकिन खनन क्षेत्रों में सुरक्षा और शांति सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी नहीं निभा रही है।
बताते हैं कि वर्ष 2021 में यह लीज बंद थी। 40 लाख रुपए पेनल्टी लगाई गई। दुबारा चलाने के लिए जांच हुई। संबंधित विभाग ने साढ़े चार करोड़ की पेनल्टी लगाई। कोर्ट में 75 प्रतिशत राशि जमा कराने का कोर्ट ने आदेश दिया। पेनल्टी राशि जमा कराने के बाद काम शुरू हुआ। करीब एक वर्ष तक काम चला। इसके बाद आंदोलन शुरू हो गया और गौचर भूमि का रास्ता काट दिया गया।