- बीपीएल परिवारों को गरीबी रेखा से ऊपर लाएगी राज्य सरकार - बिजौलिया व मांडलगढ़ में सर्वाधिक रायपुर व आसींद में सबसे कम बीपीएल
राज्य सरकार प्रदेश में बीपीएल परिवारों को स्वरोजगार योजना से जोड़ने और उन्हें गरीबी रेखा से ऊपर लाने के लिए पंडित दीनदयाल उपाध्याय गरीबी मुक्त गांव योजना लेकर आई है। योजना के तहत जिले की 13 पंचायत समितियों में 122 गांवों का चयन हुआ। योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए कलक्टर की अध्यक्षता में जिला स्तरीय समिति गठित होगी। सचिव जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी व सदस्य विभाग के अधिकारी होंगे। 13 पंचायत समिति में कुल 419 बीपीएल परिवारों का चयन किया है। इसमें 6796 गैर बीपीएल समेत कुल 7215 परिवारों को जोड़ा है।
योजना का उद्देश्य
योजना का उद्देश्य बीपीएल जनगणना-2002 के अनुसार गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन कर रहे परिवारों का जीवन स्तर एवं जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाकर उन्हें गरीबी रेखा से ऊपर लाना, केंद्र और राज्य सरकार की कल्याणकारी व सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में लक्षित समूह को प्राथमिकता प्रदान देना है। योजना प्रदेश के सभी ग्रामीण क्षेत्रों में लागू होगी। प्रथम चरण में 5 हजार गांवों को शामिल किया जाएगा। योजना शत-प्रतिशत राज्य वित्त पोषित है। योजना में निर्धारित 15 पैरामीटर पूर्ण कर गरीबी रेखा से ऊपर आने वाले पात्र परिवारों को आत्मनिर्भर परिवार कार्ड दिया जाएगा। सम्मान के रूप में 21 हजार प्रोत्साहन राशि भी दी जाएगी।
इन योजनाओं का मिलेगा फायदा
चयनित परिवारों को पीएम आवास, सामाजिक सुरक्षा, महिला सशक्तिकरण, बैंकिंग, आजीविका सृजन एवं रोजगार, अटल पेंशन योजना, किसान सम्मान निधि आदि योजनाओं का फायदा मिलेगा। जिले में सर्वाधिक बीपीएल परिवार बिजौलिया 21 व मांडलगढ़ में 20 है। जबकि सबसे कम रायपुर में 4 व आसींद व कोटड़ी में 5-5 बीपीएल शामिल है। इनके अलावा बनेड़ा व सहाड़ा में 6-6, करेड़ा व शाहपुरा में 8-8, जहाजपुर में 7, हुरड़ा में 9, सुवाणा में 11 तथा मांडल में 12 परिवार शामिल किए है।
लाभकारी योजना का मिलेगा फायदा
बीपीएल परिवारों को स्वरोजगार योजना से जोड़ने के लिए पंडित दीनदयाल उपाध्याय गरीबी मुक्त गांव योजना के तहत जिले में 122 गांवों का चयन किया है।
- मधुसुदन, अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी जिला परिषद भीलवाड़ा