
Mid-day meal: Food will be served to children only after it has been tasted by teachers and SMC members.
प्रदेश के सरकारी स्कूलों में प्रधानमंत्री पोषण योजना (मिड-डे मील) के तहत बनने वाले भोजन की गुणवत्ता और सुरक्षा को लेकर राज्य सरकार ने अब तक के सबसे सख्त निर्देश जारी किए हैं। मिड-डे मील आयुक्तालय ने स्पष्ट कर दिया है कि अब स्कूलों में भोजन का वितरण 'चखने और परखने' की कड़ी प्रक्रिया के बाद ही किया जाएगा।
मिड-डे मील आयुक्त विश्व मोहन शर्मा के अनुसार भोजन की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआइ) के नियमों का पालन अब केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि अनिवार्यता होगी।
सरकार ने साफ किया है कि भोजन वितरण से पहले प्रतिदिन दो शिक्षकों और विद्यालय प्रबंधन समिति के एक नामित सदस्य को अनिवार्य रूप से भोजन चखना होगा। यह प्रक्रिया एक रोस्टर प्रणाली के तहत होगी। चखने के बाद उन्हें एक रजिस्टर में भोजन की गुणवत्ता और स्वाद पर टिप्पणी लिखकर हस्ताक्षर करने होंगे। रजिस्टर में हस्ताक्षर होने के बाद ही विद्यार्थियों को भोजन परोसा जाएगा, यदि इस प्रक्रिया में लापरवाही मिली तो इसे गंभीर प्रशासनिक त्रुटि मानकर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
बच्चों के स्वास्थ्य को देखते हुए सरकार ने रसोई में इस्तेमाल होने वाली सामग्री को लेकर भी जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई है। भोजन में अब खुले या बिना लेबल वाले मसालों का उपयोग पूरी तरह वर्जित होगा। केवल एफएसएसएआइ मार्क वाले, एगमार्क प्रमाणित मसाले ही उपयोग में लिए जा सकेंगे। मसाला पैकेट पर निर्माण और समाप्ति तिथि की जांच अनिवार्य होगी। भोजन में किसी भी प्रकार के कृत्रिम रंग या फ्लेवरिंग एजेंट का प्रयोग सख्त निषिद्ध किया गया है।
रसोई में स्वच्छता बनाए रखने के लिए कुक-कम-हेल्पर (रसोइयों) के लिए भी कड़े नियम बनाए गए हैं। उन्हें समय-समय पर मेडिकल चेकअप करवाना होगा। खाना बनाते समय साफ वस्त्र, एप्रन और हेयर कवर पहनना अनिवार्य होगा। नाखून कटे होने चाहिए और हाथों की सफाई पर विशेष ध्यान देना होगा। उन्हें एफएसएसएआइ आधारित प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।
स्टोरेज को लेकर भी तकनीकी निर्देश दिए गए हैं। खाद्यान्न को जमीन से कम से कम 6 इंच ऊंचे प्लेटफॉर्म पर रखना होगा और इसे दीवारों से सटाकर नहीं रखा जाएगा ताकि सीलन और कीड़ों से बचाया जा सके। रसोई घर में किसी भी प्रकार के कीटनाशक या रसायनों का भंडारण पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगा।
भोजन की गुणवत्ता परखने के लिए अब वितरित भोजन और कच्ची सामग्री दाल, चावल, तेल, मसाले के सैंपल समय-समय पर प्रयोगशालाओं में जांच के लिए भेजे जाएंगे। यदि किसी स्तर पर मिलावट या अनियमितता पाई गई, तो तत्काल सुधारात्मक और अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी।
सामुदायिक सहभागिता बढ़ाने के लिए अतिथि माता अवधारणा के तहत 3-5 विद्यार्थियों की माताओं को आमंत्रित कर भोजन चखने और सुझाव देने के लिए प्रेरित किया जाएगा। इसका उद्देश्य बच्चों को सुरक्षित और पोषणयुक्त भोजन देना है। इसमें किसी भी स्तर पर कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
रामेश्वर प्रसाद जीनगर, कार्यवाहक डीईओ भीलवाड़ा
Published on:
12 Feb 2026 09:04 am
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