रोजगार की तलाश में भीलवाड़ा से महाराष्ट्र गए एक मजदूर की वहां संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। मौत की खबर भी बेहद अजीब तरीके से परिजनों तक पहुंची। ठेकेदार के आदमी ने पहले ‘व्हाट्सएप’ पर मृतक का आधार कार्ड मंगवाया और उसके महज 15 मिनट बाद ही उसकी मौत की सूचना दे दी। इस […]
रोजगार की तलाश में भीलवाड़ा से महाराष्ट्र गए एक मजदूर की वहां संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। मौत की खबर भी बेहद अजीब तरीके से परिजनों तक पहुंची। ठेकेदार के आदमी ने पहले 'व्हाट्सएप' पर मृतक का आधार कार्ड मंगवाया और उसके महज 15 मिनट बाद ही उसकी मौत की सूचना दे दी। इस घटना से गुस्साए भील समाज के लोगों और परिजनों ने शनिवार को मृतक का शव आसींद थाने के बाहर रखकर जमकर प्रदर्शन किया।
मामला आसींद थाना क्षेत्र के बराणा की झोपड़ियां का है। मृतक रमेश चंद्र भील के परिजनों ने हत्या की आशंका जताते हुए मुआवजे और सरकारी नौकरी की मांग की। थाने के घेराव और नारेबाजी की सूचना पर प्रशासन हरकत में आया। मौके पर पहुंचे आसींद उपखंड अधिकारी परमजीत सिंह और पुलिस अधिकारियों की समझाइश व सरकारी योजनाओं का लाभ देने के लिखित आश्वासन के बाद मामला शांत हुआ और परिजनों ने शव का अंतिम संस्कार किया।
मृतक की पत्नी कैसी देवी ने पुलिस को दी रिपोर्ट में बताया कि उसका पति रमेश चंद्र भील करीब एक महीने पहले भाटी खेड़ा निवासी बलबीर सिंह के साथ महाराष्ट्र के नासिक जिले (मनवाड़ तहसील) में मजदूरी के लिए गया था। सात दिन पहले उसकी पति से आखिरी बार बात हुई थी। इसके बाद संपर्क नहीं हो पाया। इसी बीच 2 फरवरी को सुबह 11 बजे वहां मौजूद संजय सिंह नामक व्यक्ति ने रमेश के भाई को फोन कर वेरिफिकेशन के नाम पर रमेश का 'आधार कार्ड' 'व्हाट्सएप' पर मंगवाया। आधार कार्ड भेजने के 15 मिनट बाद ही संजय सिंह ने फोन कर रमेश की मौत की सूचना दे दी। इस संदिग्ध घटनाक्रम के बाद परिजन महाराष्ट्र पहुंचे और शव को आसींद लेकर आए।
प्रदर्शन के दौरान एसडीएम परमजीत सिंह ने मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए पीड़ित परिवार को तत्काल सरकारी सहायता का आश्वासन दिया। प्रशासन ने मृतक के आश्रितों को निम्न योजनाओं से जोड़ने की बात कही। मुख्यमंत्री आयुष्मान योजना। विधवा पेंशन योजना। पालनहार योजना (बच्चों के लिए)। प्रधानमंत्री आवास योजना।
आसींद डीवाईएसपी ओमप्रकाश ने बताया कि घटना स्थल महाराष्ट्र का है, लेकिन परिजनों की शिकायत पर हमने त्वरित कार्रवाई करते हुए जीरो नंबर एफआईआर दर्ज कर ली थी। चूंकि मामला दूसरे राज्य का है, इसलिए जांच के लिए एफआईआर को ऑनलाइन महाराष्ट्र के संबंधित थाने में भेज दिया गया है। अब आगे की तफ्तीश महाराष्ट्र पुलिस करेगी।