जीवन में कितने भी कष्ट आ जाएं, भक्ति और भजन नहीं छूटने चाहिए। सुख को हरि कृपा और कष्ट को हरि इच्छा मानकर स्वीकार करने से जीवन का कल्याण होता है। ये विचार रोडवेज बस स्टैंड के पास अग्रवाल उत्सव भवन में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान सप्ताह के दूसरे दिन व्यासपीठ से कथा वाचन […]
जीवन में कितने भी कष्ट आ जाएं, भक्ति और भजन नहीं छूटने चाहिए। सुख को हरि कृपा और कष्ट को हरि इच्छा मानकर स्वीकार करने से जीवन का कल्याण होता है। ये विचार रोडवेज बस स्टैंड के पास अग्रवाल उत्सव भवन में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान सप्ताह के दूसरे दिन व्यासपीठ से कथा वाचन करते हुए रामस्नेही संत दिग्विजय राम ने व्यक्त किए। गीतादेवी तोषनीवाल चैरिटेबल ट्रस्ट के तत्वावधान में चल रही कथा में दूसरे दिन कपिल-देवहुति संवाद, सती चरित्र व धुव चरित्र का प्रसंग हुआ। संत ने कहा कि प्रभु से सांसारिक वस्तुएं नहीं, बल्कि हृदय में वास की प्रार्थना करनी चाहिए। कथा के दौरान मंच पर संत रामप्रसाद, सूरसागर जोधपुर, युवाचार्य गोविंद शास्त्री खेड़ापा पीठ, महंत जोगेश्वरदास, सिद्धबली हनुमान मंदिर, महंत सागरदास , हमीरगढ़ व अनुजदासमुंगाना धाम का सानिध्य रहा। भजनों पर श्रद्धालु भावविभोर होकर झूम उठे।
पंच कुण्डीय श्री विष्णु महायज्ञ में यजमान दे रहे आहूतियां
पंच कुण्डीय विष्णु महायज्ञ दूसरे दिन मंगलवार को भी जारी रहा। महायज्ञ प्रतिदिन सुबह 8 से दोपहर 12.30 बजे तक ज्ञायिक रत्न आचार्य पंडित गौरीशंकर शास्त्री एवं वैदिक विद्धानों के तत्वावधान में हो रहा है। महायज्ञ में दूसरे दिन दीपक राधिका तोषनीवाल, संजय अनिता लड्ढ़ा, शुभम पारूल तोषनीवाल, तपन आरती झंवर, शिवकुमार संगीता काकानी, निलेश किरण काकानी, सुनील पूजा बांगड़ सहित तोषनीवाल परिवार के कई सदस्यों एवं श्रद्धालुओं ने यज्ञ कुण्ड में सजोड़ा आहुति दी। इस यज्ञ में प्रतिदिन अलग-अलग जजमान शामिल होकर सर्व मंगल एवं सुख शांति की कामना से आहुति दे रहे है।