शक्ति की आराधना का महापर्व ‘चैत्र नवरात्र इस वर्ष 19 मार्च से शुरू होकर 27 मार्च तक मनाया जाएगा। इस बार की नवरात्र ग्रह-नक्षत्रों के एक ऐसे अद्भुत संयोग के साथ आ रही है, जो पिछले 90 वर्षों में नहीं देखा गया। पहले ही दिन चैत्र कृष्ण पक्ष अमावस्या, प्रतिपदा और गौतम जयंती का विशेष […]
शक्ति की आराधना का महापर्व 'चैत्र नवरात्र इस वर्ष 19 मार्च से शुरू होकर 27 मार्च तक मनाया जाएगा। इस बार की नवरात्र ग्रह-नक्षत्रों के एक ऐसे अद्भुत संयोग के साथ आ रही है, जो पिछले 90 वर्षों में नहीं देखा गया। पहले ही दिन चैत्र कृष्ण पक्ष अमावस्या, प्रतिपदा और गौतम जयंती का विशेष त्रिवेणी संयोग बन रहा है, जो इस पर्व की महत्ता को और बढ़ा रहा है।
पंडित अशोक व्यास के अनुसार इस वर्ष लगभग 90 वर्षों बाद ऐसा दुर्लभ संयोग बन रहा है जब माता दुर्गा पालकी पर सवार होकर पृथ्वी लोक पर पधारेंगी। माता का पालकी पर आगमन जनमानस के लिए मिश्रित फलदायी माना जाता है और यह विश्व में कुछ अशांति व उथल-पुथल के संकेत देता है। हालांकि राहत की बात यह है कि माता की विदाई हाथी पर होगी। हाथी पर विदाई को अत्यंत शुभ माना गया है जो देश में सुख-समृद्धि, खुशहाली और उत्तम वर्षा का सूचक है।
नवरात्र के प्रथम दिन कलश (घट) स्थापना का विशेष महत्व होता है। इसके लिए सबसे श्रेष्ठ अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:22 बजे से 1:10 बजे तक रहेगा। इसके अलावा श्रद्धालु अपनी सुविधानुसार अन्य शुभ चौघड़ियों में भी घटस्थापना कर सकते हैं।
इस वर्ष तिथियों के घट-बढ़ के चलते नवमी तिथि को लेकर भी विशेष स्थिति बन रही है। इस बार महाअष्टमी (दुर्गाष्टमी) और भगवान राम का जन्मोत्सव रामनवमी एक ही दिन 26 मार्च को उल्लासपूर्वक मनाए जाएंगे। वहीं 27 मार्च को नवरात्र पर्व की पूर्णता (पारण) होगी।