राजस्थान उच्च न्यायालय के प्रदेश की कुल 93 और भीलवाड़ा जिले की 48 बजरी लीज निरस्त करने के आदेश के बाद जिले में निर्माण सामग्री के बाजार में हड़कंपमच गया है। आदेश का प्रभाव धरातल पर आने से पहले ही लीज धारकों ने ‘मुनाफाखोरी’ का नया रास्ता निकाल लिया है। नदी पेटे से भारी मशीनों […]
राजस्थान उच्च न्यायालय के प्रदेश की कुल 93 और भीलवाड़ा जिले की 48 बजरी लीज निरस्त करने के आदेश के बाद जिले में निर्माण सामग्री के बाजार में हड़कंपमच गया है। आदेश का प्रभाव धरातल पर आने से पहले ही लीज धारकों ने 'मुनाफाखोरी' का नया रास्ता निकाल लिया है। नदी पेटे से भारी मशीनों के जरिए दिन-रात बजरी निकाल कर निजी स्टॉक पॉइंट पर जमा की जा रही है, ताकि लीज बंद होने के बाद भी रवन्नों के जरिए ऊंचे दामों पर माल बेचा जा सके।
कोर्ट के आदेश की सुगबुगाहट के साथ ही जिले में बजरी के दाम आसमान छूने लगे हैं। निर्माण कार्य करवा रहे आम आदमी पर इसका सीधा भार पड़ेगा। ट्रैक्टर-ट्रॉली पहले की तुलना में 1000 से 2000 रुपए महंगी मिलेगी। अब एक ट्रॉली 5 से 6 हजार रुपए में मिल रही है। वहीं 40 टन बजरी के डंपर के लिए 50 हजार रुपए तक वसूले जा रहे हैं। माफिया और सप्लायर अब पहले एडवांस पैसे मांग रहे हैं और पकड़े जाने के डर से केवल रात में ही खाली करने की शर्त रख रहे हैं।
हाईकोर्ट ने भले ही लीज निरस्त करने के आदेश दे दिए हों, लेकिन भीलवाड़ा में खनिज विभाग के हाथ अब भी 'आदेश की कॉपी' के इंतजार में बंधे हैं। जिले की 5 प्रमुख लीज बंद होनी हैं, लेकिन अधिकारियों का कहना है कि जब तक खान निदेशालय उदयपुर से स्पष्ट निर्देश नहीं मिलते, वे कार्रवाई नहीं कर सकते। इसी ढिलाई का फायदा उठाकर लीज धारक पूरी ताकत से नदी को छलनी कर स्टॉक भरने में जुटे हैं।
लीज धारक संजय पेडिवाल का कहना है कि राजस्थान उच्च न्यायालय के आदेश अभी अपलोड नहीं हुए हैं। आदेश में लीज को अगर बंद करने के आदेश हैं तो इस आदेश के खिलाफ राज्य सरकार सुप्रीम कार्ट नहीं जाती है तो लीजधारक जाएंगे। वैसे भी अपील करने का तीन माह तक का समय होता है। लीज को चलाने के लिए करोड़ों रुपए की मशीनरी के साथ अन्य सुरक्षा कारणों पर खर्च किए हैं। उस राशि का क्या होगा।
आने वाले दिनों में यह होगा बड़ा संकट
अभी आदेश नहीं मिले
हमें अभी तक डीएमजी (निदेशालय) से लीज बंद करने के लिखित आदेश प्राप्त नहीं हुए हैं। जैसे ही आदेश मिलेंगे, नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
महेश शर्मा, खनिज विभाग, भीलवाड़ा