प्रदेश के बहुप्रतीक्षित ईस्टर्न राजस्थान कैनाल प्रोजेक्ट (ईआरसीपी) को लेकर भजनलाल सरकार ने समय सीमा तय कर दी है। जल संसाधन मंत्री सुरेश रावत ने सोमवार को भीलवाड़ा में बड़ा दावा करते हुए कहा कि दिसंबर 2027 तक ईआरसीपी का काम पूरा कर लिया जाएगा। इसके लिए चंबल नदी पर केशोरायपाटन के पास अनुभवी इंजीनियरों […]
प्रदेश के बहुप्रतीक्षित ईस्टर्न राजस्थान कैनाल प्रोजेक्ट (ईआरसीपी) को लेकर भजनलाल सरकार ने समय सीमा तय कर दी है। जल संसाधन मंत्री सुरेश रावत ने सोमवार को भीलवाड़ा में बड़ा दावा करते हुए कहा कि दिसंबर 2027 तक ईआरसीपी का काम पूरा कर लिया जाएगा। इसके लिए चंबल नदी पर केशोरायपाटन के पास अनुभवी इंजीनियरों की देखरेख में मशीनें 24 घंटे काम कर रही हैं।
केंद्रीय बजट पर चर्चा करने भीलवाड़ा पहुंचे मंत्री रावत ने सर्किट हाउस में पत्रकारों से रूबरू होते हुए मेवाड़ और शेखावाटी के लिए भी पिटारा खोला। उन्होंने बताया कि मेवाड़ के सूखे कंठ तर करने के लिए माही और जाखम परियोजना की डीपीआर बनाई जा रही है। इस योजना के धरातल पर उतरते ही भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़, राजसमंद और उदयपुर जिले के बांध लबालब होंगे। विशेष रूप से माही-जाखम का अधिशेष पानी भीलवाड़ा की लाइफलाइन मेजा बांध में लाया जाएगा। इससे क्षेत्र में सिंचाई और पेयजल का संकट हमेशा के लिए खत्म हो जाएगा।
रावत ने बताया कि शेखावाटी अंचल की प्यास बुझाने के लिए भी सरकार गंभीर है। सीकर, झुंझुनू और चूरू जिलों के लिए यमुना जल लाने के लिए डीपीआर बनकर तैयार हो चुकी है। जल्द ही इस दिशा में भी काम आगे बढ़ेगा।
पूर्व सीएम अशोक गहलोत की ओर से केंद्रीय बजट में ईआरसीपी का जिक्र नहीं होने पर उठाए गए सवालों पर मंत्री रावत ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा विपक्ष के लोगों को भगवान सद्बुद्धि दे। जब प्रदेश में कांग्रेस की सरकार थी, तब वे सिर्फ ईआरसीपी की बातें करते थे, काम नहीं। बजट का कोई प्रावधान नहीं था। मैं विभाग का मंत्री हूं और जिम्मेदारी से कहता हूं कि भाजपा सरकार ने आते ही टेंडर प्रक्रिया को आगे बढ़ाया। दूसरे फेज के लिए 14 हजार करोड़ के टेंडर हो चुके हैं और वर्क ऑर्डर भी जारी कर दिए गए हैं। यह योजना 17 जिलों के लिए वरदान साबित होगी। अशोक गहलोत के आरोप केवल राजनीति से प्रेरित हैं।