बदलते मौसम के मिजाज ने आमजन की सेहत बिगाड़ दी है, जिसका सीधा असर शहर के सबसे बड़े महात्मा गांधी चिकित्सालय में देखने को मिल रहा है। इन दिनों अस्पताल में मरीजों की भीड़ उमड़ रही है, लेकिन बढ़ते दबाव के बीच अस्पताल की बुनियादी व्यवस्थाएं चरमराती नजर आ रही हैं। मंगलवार सुबह मेडिकल ओपीडी […]
बदलते मौसम के मिजाज ने आमजन की सेहत बिगाड़ दी है, जिसका सीधा असर शहर के सबसे बड़े महात्मा गांधी चिकित्सालय में देखने को मिल रहा है। इन दिनों अस्पताल में मरीजों की भीड़ उमड़ रही है, लेकिन बढ़ते दबाव के बीच अस्पताल की बुनियादी व्यवस्थाएं चरमराती नजर आ रही हैं।
मंगलवार सुबह मेडिकल ओपीडी के बाहर एक विचलित करने वाला दृश्य सामने आया। ऑर्थोपेडिक ओपीडी में दिखाने आए एक मरीज को जब समय पर व्हीलचेयर उपलब्ध नहीं हुई, तो उसे अपने दो साथियों के कंधों का सहारा लेना पड़ा। 'ट्रॉली मैन' की अनुपलब्धता के कारण मरीज को इसी स्थिति में गलियारे से गुजरते देखा गया। कर्मचारियों की माने तो ओपीडी में अचानक बढ़ी मरीजों की संख्या के कारण संसाधनों पर दबाव बढ़ा है। प्रतिदिन काफी की संख्या में लोग पहुंच रहे हैं, जिससे उपलब्ध ट्रॉली मेन कम पड़ रहे हैं। गौरतलब है कि चिकित्सक और नर्सिंग स्टाफ बढ़ते लोड के बावजूद सेवाएं देने का प्रयास कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर ट्रॉली जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव मरीजों की पीड़ा को बढ़ा रहा है। प्रशासन को चाहिए कि वह भीड़भाड़ वाले समय में अतिरिक्त स्टाफ की व्यवस्था सुनिश्चित करे, ताकि किसी भी लाचार मरीज को "कंधों का सहारा" न लेना पड़े।