भिवाड़ी

महंगी बिजली का खोजा विकल्प, सैकड़ों किमी दूर लगाए सोलर प्लांट

भिवाड़ी. भिवाड़ी के उद्यमियों ने उत्पादन लागत को बचाने महंगी बिजली का सस्ता विकल्प भी खोजा है। 22 फैक्टरी ने बाड़मेर जैसलमेर में सोलर प्लांट लगाकर सरकार से एक्सचेंज में बिजली लेना शुरू किया है। जनवरी के महीने में सोलर प्लांट से मिली 96.65 लाख बिजली उद्यमियों को खाते में जोड़ी गई है। उद्योग क्षेत्र […]

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जनवरी में 96.65 लाख यूनिट 22 फैक्टरी के खाते में की कम जितनी बिजली उत्पादित होगी, उतने यूनिट कम होंगे

भिवाड़ी. भिवाड़ी के उद्यमियों ने उत्पादन लागत को बचाने महंगी बिजली का सस्ता विकल्प भी खोजा है। 22 फैक्टरी ने बाड़मेर जैसलमेर में सोलर प्लांट लगाकर सरकार से एक्सचेंज में बिजली लेना शुरू किया है। जनवरी के महीने में सोलर प्लांट से मिली 96.65 लाख बिजली उद्यमियों को खाते में जोड़ी गई है। उद्योग क्षेत्र भिवाड़ी के उद्यमी एक तरफ नए-नए उद्योग लगाकर राजस्व से सरकार का खजाना भर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ कम लागत में उत्पादन के लिए भी भरसक प्रयास कर रहे हैं। इसी कड़ी में भिवाड़ी के उद्यमियों ने बीकानेर जैसलमेर में हजारों किमी दूरी पर सोलर प्लांट लगाए हैं। इन प्लांट से उत्पादित बिजली सरकार को दे रहे हैं, इसके बदले में यूनिट भिवाड़ी के कारखाने के लिए ले रहे हैं। इससे उद्यमियों को सस्ती बिजली मिल रही है। प्रदेश में बिजली महंगी है। प्रदेश में बिजली की बेस रेट प्रति यूनिट 7.30 पैसे है, इसके साथ ही अन्य शुल्क लग जाते हैं, जबकि पंजाब में छह रुपए प्रति यूनिट है, इसके साथ ही आसपास के अन्य प्रदेशों में भी सस्ती बिजली है। भिवाड़ी उद्योग क्षेत्र की 177 इकाइयों में भी सोलर प्लांट लगे हुए हैं। इनकी क्षमता 45 हजार किलोवाट से अधिक है। सोलर प्लांट से एक महीने में करीब 43 लाख यूनिट बिजली उत्पादित होती है। जो कि भिवाड़ी में होने वाली खपत का करीब दो फीसदी है।

ट्रांसमिशन शुल्क चार प्रतिशत
बीकानेर जैसलमेर में सोलर प्लांट लगाने पर उद्यमियों को फायदा है। इससे सरकार को भी लाभ है। बीकानेर जैसलमेर में जमीन सस्ती है। कम लागत में सोलर प्लांट लग जाता है। सरकार को प्राकृतिक ऊर्जा मिलती है। वहां बिजली उत्पादित कर उद्यमियों को चार प्रतिशत लाइन लॉस (ट्रांसमिशन शुल्क) काटने के बाद भिवाड़ी में यूनिट मिल जाते हैं। सोलर प्लांट में एक लाख यूनिट बिजली उत्पादित होने पर भिवाड़ी में 96 हजार यूनिट मिल जाएगी। उद्योगों की बेस रेट को ही आधार मानने पर एक लाख यूनिट का बिल 7.50 लाख रुपए आएगा। जबकि उद्यमी को वही बिजली मात्र दो से तीन लाख रुपए की लागत में मिल जाएगी। क्योंकि सरकार कुसुम योजना के तहत सोलर प्लांट सेे तीन से साढ़े तीन रुपए प्रति यूनिट में बिजली खरीद रही है।

उत्पादन की लागत कम
उद्यमियों की इस सकारात्मक सोच से एक तरफ उत्पादित वस्तु की लागत कम होगी। उत्पादन में बिजली की लागत बड़ा हिस्सा होती है। बिजली की लागत जितनी कम होगी उत्पादन की कीमत उतनी घट जाएगी। दूसरी तरफ सैकड़ों किमी दूर लगने से प्राकृतिक ऊर्जा का सदुपयोग हो रहा है। नए प्लांट लगने से नए रोजगार का सृजन हो रहा है।

इस तरह समझिए गणित
एक मेगावाट का प्लांट लगाने में करीब तीन करोड़ की लागत आती है। प्रतिदिन छह हजार यूनिट बिजली उत्पादित होती है। प्लांट की अवधि 25 साल होती है। इस अवधि में प्लांट से 5.47 करोड़ यूनिट बिजली उत्पादित होगी। इस तरह एक यूनिट की लागत करीब 1.82 रुपए प्रति यूनिट आएगी। बैंक ब्याज जोडऩे पर करीब दो रुपए प्रति यूनिट की लागत आएगी। इस तरह डिस्कॉम से मिल रही बिजली से पांच रुपए प्रति यूनिट सस्ती बिजली मिलेगी।

प्रदेश में बिजली की दर आसपास के प्रदेशों की अपेक्षा अधिक है। दूसरी तरफ सौर ऊर्जा का उपयोग होने से पर्यावरण सुरक्षित रहेगा। भिवाड़ी में हमारी दो फैक्टरी हैं, दोनों में ऊर्जा खपत अधिक है, इसलिए हमने बीकानेर में सोलर प्लांट लगाया है। सस्ती बिजली मिलने पर हमारी लागत में कमी आएगी, जिससे हम बाजार में बेहतर प्रतिस्पर्धा कर सकेंगे।
रामप्रकाश गर्ग, उद्यमी

22 फैक्टरी के सोलर प्लांट लग चुके हैं, कुछ आवेदन प्रक्रिया में है। सोलर प्लांट से जितनी बिजली उत्पादित होगी, ट्रांसमिशन शुल्क लेने के बाद उसका बिल कम हो जाता है। जनवरी में करीब एक करोड़ यूनिट कम किए हैं।
जेपी बैरवा, अधीक्षण अभियंता

Published on:
27 Feb 2026 05:16 pm
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