रीवा, सागर, ग्वालियर, जबलपुर संभाग की हालत खराब
भोपाल. किसान कर्जमाफी सरकार और सहकारी बैंकों के लिए बड़ा सिरदर्द साबित हो रही है। कांग्रेस शासनकाल में किसान कर्जमाफी से अब किसान फसल ऋण लेने के बाद उसे चुकाने से पीछे हट रहे हैं। प्रदेश में हह साल लगभग 30 से 35 फीसदी किसान सहकारी बैंकों से कर्ज लेकर उसे वापस नहीं लौटा रहे हैं।
इससे जिला सहकारी बैंकों और समितियों की वित्तीय स्थिति दिनोंदिन खराब हो रही है। इसके अलावा किसानों को खाद-बीज के अलावा कर्ज लेने में भी दिक्कतें आ रही हैं। बता दें, सरकार हर साल किसानों को 12 से 14 हजार करोड़रुपए शून्य प्रतिशत ब्याज पर फसल ऋण देती है। इस साल 67% किसानों से वसूली हो पाई है।
इन संभागों में हालत ज्यादा खराब
ऋण वसूली नहीं होने के मामले में ज्यादा खराब हालत रीवा, सागर, ग्वालियर, जबलपुर संभाग की है। यहां 20 फीसदी राशि डूबत खाते में जा रही है। ऐसे में बैंक और सहकारी समितियां डिफाल्टर हो रही हैं। ऐसा ही रहा तो आने वाले विधानसभा चुनाव से पहले सहकारी बैंक 2018 जैसी स्थिति में पहुंचेंगे। करीब 20 लाख किसान डिफाल्टर होंगे।
सालाना 28 लाख किसानों को देते हैं कर्ज
प्रदेश की 38 जिला सहकारी बैंकों के जरिए हर साल 28 लाख किसानों को ऋण मुहैया कराया जाता है, जबकि पूरे प्रदेश में हर साल पांच से सात लाख लोग रुपए वापस करते हैं। इससे किसानों को खाद-बीज और फसल ऋण नहीं मिल पाता। ऐसे किसान 12 से 15 फीसदी ब्याज दर पर साहूकारों से ऋण लेने को मजबूर होते हैं।
वसूली में खरगोन आगे
खरगोन जिला सहकारी बैंक हर साल किसानों को ढाई हजार करोड़ रुपए का लोन देता है और सौ फीसदी वसूली करता है। इंदौर-उज्जैन संभाग के सहकारी बैंक भी ऋण वसूली में बेहतर हैं।